इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रयागराज कुंभ गर्ल की जन्मतिथि बदलने का आदेश निरस्त, बिना सुने बदलाव को बताया प्राकृतिक न्याय के खिलाफ
इंदौर हाईकोर्ट ने प्रयागराज कुंभ गर्ल की जन्मतिथि में बदलाव का आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बिना पक्ष सुने जन्म प्रमाणपत्र में संशोधन प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है।
मध्य प्रदेश के महेश्वर की चर्चित 'प्रयागराज कुंभ गर्ल' के जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) को लेकर उच्च न्यायालय (High Court) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने महेश्वर नगर परिषद द्वारा 31 मार्च 2026 को जन्मतिथि में सुधार को लेकर जारी किए गए आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जन्मतिथि में किसी भी तरह के बदलाव से संबंधित युवती के हित सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में उसे अपना पक्ष रखने के लिए सुनवाई का कोई अवसर ही नहीं दिया गया था, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पूर्णतः विपरीत है।
📝 साल 2025 में बना था जन्म प्रमाण पत्र, 11 मार्च 2026 को युवती ने अपनी मर्जी से कर लिया था विवाह
पूरे मामले की शुरुआत पिछले साल हुई थी, जब युवती के माता-पिता ने 30 मई 2025 को नगर परिषद कार्यालय में आवेदन देकर उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज करते हुए जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग की थी। इसके बाद 5 जून 2025 को नगर परिषद ने इसी जन्मतिथि के आधार पर उसका जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिया था। इस आधिकारिक प्रमाण-पत्र के हिसाब से युवती 1 जनवरी 2026 को वयस्क हो गई थी और उसने अपनी स्वतंत्र इच्छा से 11 मार्च 2026 को अपनी पसंद के युवक से विवाह कर लिया था। इसके कुछ समय बाद उसके पिता ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए जन्मतिथि बदलकर 30 दिसंबर 2009 करने का आवेदन दिया, जिस पर नगर परिषद ने संशोधन कर दिया था।
⚖️ आधार और पैन कार्ड में दर्ज है 1 जनवरी 2008 जन्मतिथि, बिना सुने बदलाव करना प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध: हाईकोर्ट
जन्म प्रमाण पत्र में किए गए इस अचानक बदलाव को चुनौती देते हुए युवती और उसके पति ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ में याचिका दायर की थी। याचिका में दलील दी गई कि वर्ष 2015 में जारी हुए आधार कार्ड और पैन कार्ड दोनों में युवती की जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 ही दर्ज है, और बिना उसका पक्ष सुने अधिकारी कैसे जन्मतिथि बदल सकते हैं। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के रिकॉर्ड में बिना उसे सुने बदलाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी के 31 मार्च 2026 के आदेश को खारिज करते हुए निर्देश दिया है कि इस मामले में युवती को भी सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए और कानून के प्रावधानों के तहत नए सिरे से उचित निर्णय लिया जाए।
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