15 अक्टूबर से लागू होने वाले नियम के खिलाफ देश भर के कारोबारियों में आक्रोश, जानें क्या है पूरा मामला

2 अक्टूबर को देशभर के व्यापारी 'नो यूपीआई डे' मनाएंगे। 15 अक्टूबर से लागू होने वाले एमडीआर चार्ज के विरोध में डिजिटल पेमेंट स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Oct 01, 2026 - 21:16
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15 अक्टूबर से लागू होने वाले नियम के खिलाफ देश भर के कारोबारियों में आक्रोश, जानें क्या है पूरा मामला

यदि आप 2 अक्टूबर की छुट्टी पर शॉपिंग करने या बाजार जाने का मन बना रहे हैं, तो घर से निकलते वक्त अपनी जेब में कैश रखना बिल्कुल न भूलें। देशभर के व्यापारी 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ (No UPI Day) मनाने जा रहे हैं। मुंबई से लेकर दिल्ली तक के कारोबारी इस दिन ग्राहकों से किसी भी प्रकार का डिजिटल पेमेंट स्वीकार नहीं करेंगे। दुकानों पर रखे क्यूआर (QR) कोड स्कैनर काले कपड़ों से ढके रहेंगे और साउंड बॉक्स भी खामोश रहेंगे। व्यापारियों का यह विरोध आगामी 15 अक्टूबर से लागू होने वाले एमडीआर (MDR) नियम के खिलाफ किया जा रहा है।

💸 त्योहारी सीजन में मुनाफे पर मंडराया खतरा, 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर लगेगा 0.40% चार्ज

इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.40 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA), चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और कई अन्य व्यापारी संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया है। कारोबारियों का कहना है कि फेस्टिव सीजन में जब बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है, ऐसे में यह अतिरिक्त शुल्क उनके सीमित मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर देगा। हालांकि, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस विरोध प्रदर्शन से दूरी बना ली है।

🏛️ वित्त मंत्रालय की सफाई: छोटे दुकानदारों को मिलेगी राहत, जानें क्या है एमडीआर (MDR) की पूरी व्यवस्था

व्यापारियों के विरोध के बीच वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस नए नियम का असर केवल बड़े कारोबारियों पर ही पड़ेगा। जिन दुकानदारों की यूपीआई से महीने की कमाई 1 लाख रुपये से कम है, उन्हें इस चार्ज से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। इसके अलावा, बड़े ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, एमडीआर डिजिटल पेमेंट नेटवर्क (बैंकों और पेमेंट ऐप्स) के रखरखाव के लिए होता है और इसका एक भी पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाता है।

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