डाइक्लोफेनाक बैन के बाद मध्य प्रदेश में बढ़ा गिद्धों का कुनबा, हलाली डैम बना अनुकूल रहवास
भोपाल और रायसेन के जंगलों में गिद्धों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। केरवा संरक्षण केंद्र और हलाली डैम क्षेत्र में इनके लिए अनुकूल रहवास तैयार किया जा रहा है।
कभी गांवों के आसमान में झुंड बनाकर उड़ने वाला गिद्ध अब एक बार फिर अपनी वापसी दर्ज करा रहा है। जिस परिंदे को लोग बरसों से सिर्फ बुजुर्गों की कहानियों और बातों में सुनते आए थे, उसकी उड़ान अब भोपाल की पहाड़ियों, जंगलों और ग्रामीण इलाकों में दोबारा दिखाई देने लगी है। केरवा से लेकर रायसेन के हलाली डैम तक इन विलुप्तप्राय परिंदों के लिए एक सुरक्षित रहवास तैयार हो रहा है, जिससे पर्यावरण प्रेमियों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
🚫 डाइक्लोफेनाक के प्रतिबंध से मिली राहत: 10 वर्षों में राज्य में 123 प्रतिशत बढ़ी गिद्धों की संख्या
एक दौर था जब पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक दवा 'डाइक्लोफेनाक' के कारण गिद्धों की आबादी देश भर में करीब 95 प्रतिशत तक गिर गई थी। मरे हुए पशुओं के शरीर में इस दवा के अवशेष मिलने से गिद्धों की किडनी फेल होने लगी थी। हालांकि, साल 2006 में इस दवा पर प्रतिबंध लगने और संरक्षण के कड़े प्रयास शुरू होने के बाद स्थिति सुधरी है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 2016 की शीतकालीन गणना में जहां 6,999 गिद्ध दर्ज हुए थे, वहीं 2026 की गणना में यह संख्या बढ़कर 15,641 हो गई है, यानी एक दशक में करीब 123 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
📍 केरवा संरक्षण केंद्र से हलाली डैम तक विस्तार: जीपीएस टैगिंग के साथ खुले आसमान में छोड़े जा रहे पक्षी
राजधानी के केरवा बांध स्थित वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के संयुक्त संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में वर्तमान में भारतीय देसी और सफेद पीठ प्रजाति के 94 गिद्ध मौजूद हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति के तहत हलाली डैम के खुले जंगलों में छोड़े जाने की योजना है। इन सभी गिद्धों पर जीपीएस (GPS) टैग लगाए जाएंगे ताकि उनकी उड़ान और हर गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। हाल ही में भोपाल के पास समरधा क्षेत्र के भैंसाया गांव में 100 से अधिक गिद्धों के एक साथ जमीन पर उतरने का नजारा देखा गया, जो इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति का यह सफाईकर्मी अब अपने प्राकृतिक आवास में तेजी से लौट रहा है।
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