गुना में इंसानियत शर्मसार, मकान मालिक ने घर से शवयात्रा निकालने से रोका तो अस्पताल परिसर में करनी पड़ी अंतिम संस्कार की तैयारी
गुना में मकान मालिक की अमानवीयता। बेटी की मौत के बाद शव घर लाने से रोका, अस्पताल परिसर में पिता को करनी पड़ी अंतिम संस्कार की तैयारी।
गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक बेहद झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जो मिडिल और लोअर क्लास के लोगों द्वारा किराये के मकान में सहेजे जाने वाले दर्द को बयां करता है। गुना के घोसीपुरा क्षेत्र में पिछले 4 साल से एक कमरे के मकान में किराये पर रहने वाले एक गरीब मजदूर की बेटी की बीमारी के चलते अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। जब पिता अपनी मृत बेटी का शव लेकर घर पहुंचा, तो मकान मालिक ने नवरात्रि का बहाना बनाकर डेडबॉडी को घर के अंदर लाने और वहां से शवयात्रा निकालने से साफ इनकार कर दिया। पीड़ित पिता ने मकान मालिक के आगे हाथ जोड़े, लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा।
🏥 जिला अस्पताल परिसर में सजाई गई अर्थी: समाजसेवियों के आगे आने पर हुआ अंतिम संस्कार, पिता के छलके आंसू
बेटी के शव को घर ले जाने से रोके जाने के बाद मजबूर पिता पहलवान रजक (निवासी बदरवास) को अस्पताल परिसर में ही अर्थी सजाने के लिए विवश होना पड़ा। जिला अस्पताल परिसर में रोते-बिलखते परिजनों और खड़े शव वाहन को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। जब लोगों ने इस अमानवीय घटना के बारे में जाना, तो शहर के समाजसेवी प्रमोद भार्गव और राम सिंह रजक जैसे लोग मदद के लिए आगे आए और उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए अंतिम संस्कार में सहयोग किया। इस घटना ने समाज में किरायेदार और मकान मालिक के रिश्तों के बीच संवेदनाओं के गिरते स्तर पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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