मतांतरण रोकने और संस्कृति संरक्षण के लिए गांव-गांव चलेगा अभियान, जनजाति सुरक्षा मंच की बड़ी तैयारी
झाबुआ और मध्य प्रदेश के अन्य जनजातीय क्षेत्रों में मतांतरण रोकने के लिए जनजाति सुरक्षा मंच गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाएगा। पेसा एक्ट और ग्राम समितियों के गठन पर रहेगा जोर।
झाबुआ। मध्य प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण और मतांतरण की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जनजाति सुरक्षा मंच ने व्यापक स्तर पर कमर कस ली है। दीपावली के तुरंत बाद ग्रामीण अंचलों में एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस अभियान के तहत पेसा अधिनियम (पंचायत उपबंध अधिनियम 1996) के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम समितियों का गठन किया जाएगा, गांवों में बाहर से आने वाले संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी तथा रोजगार या अन्य कारणों से पलायन करने वाले परिवारों का सटीक विवरण भी रखा जाएगा, ताकि समाज की मूल संस्कृति और पहचान सुरक्षित रह सके।
🚫 गाँवों के प्रवेश द्वार पर लगेंगे रोक संबंधी सूचना पट्ट: डीलिस्टिंग और आरक्षण के मुद्दों पर भी तेज होगी मुहिम
मंच की योजना के मुताबिक, जनजातीय गांवों के प्रवेश द्वार पर विशेष सूचना पट्ट (बोर्ड) लगाए जाएंगे, जिन पर धर्मांतरण के उद्देश्य से आने वाले धर्म प्रचारकों, बाहरी गतिविधियों और प्रार्थना सभाओं पर रोक संबंधी स्पष्ट संदेश लिखे होंगे। पदाधिकारियों का कहना है कि झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जैसे जिलों में समय-समय पर मतांतरण के मामले सामने आते रहे हैं, जिनका कोई आधिकारिक या व्यवस्थित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि यह मंच पहले से ही 'डीलिस्टिंग अभियान' के माध्यम से मतांतरित हो चुके जनजातीय लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने और उन्हें मिलने वाले आरक्षण व सरकारी सुविधाओं के लाभ को समाप्त करने की मांग उठा रहा है। मंच के प्रांत संयोजक मेहताब बर्डे के अनुसार गांवों में जनजातीय अस्मिता की रक्षा के लिए जन-जागरण को और तेज किया जाएगा।
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