जबलपुर समाचार: 12, 24, 30 और 35 वर्ष की सेवा अवधि का दोबारा परीक्षण, सेवा पुस्तिकाओं के साथ उपस्थित होने का आदेश

जबलपुर डीईओ ने शिक्षकों के 12, 24, 30 और 35 वर्ष की सेवा अवधि प्रस्तावों के पुनरीक्षण का आदेश दिया। संकुल प्राचार्यों को सेवा पुस्तिकाओं के साथ बुलाया।

Nov 05, 2026 - 10:48
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जबलपुर समाचार: 12, 24, 30 और 35 वर्ष की सेवा अवधि का दोबारा परीक्षण, सेवा पुस्तिकाओं के साथ उपस्थित होने का आदेश

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के सेवा अभिलेखों और क्रमोन्नति/समयमान वेतनमान से जुड़े प्रस्तावों में पारदर्शिता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। जबलपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए 12, 24, 30 और 35 वर्ष की सेवा अवधि के प्रस्तावों का पुनः परीक्षण (Re-verification) किया जाएगा। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को आवश्यक एवं मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

⏰ सुबह 11 बजे डीईओ कार्यालय के सभा कक्ष में उपस्थित होने के निर्देश

बैठक और समीक्षा का विवरण:

  • उपस्थिति का समय व स्थान: जारी आदेश के तहत सभी संबंधित अधिकारियों को 5 नवंबर को सुबह 11:00 बजे अनिवार्य रूप से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जबलपुर के सभा कक्ष में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।

  • जरूरी दस्तावेज: जबलपुर और सिहोरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सभी संबंधित संकुल प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीनस्थ शिक्षकों की मूल सेवा पुस्तिकाएं (Original Service Books) और प्रस्ताव से संबंधित संपूर्ण आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर आएं।

🔍 शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं का होगा गहन सत्यापन; प्रस्तावों का त्वरित निस्तारण लक्ष्य

प्रशासनिक प्रक्रिया और उद्देश्य:

  • गहन जांच प्रक्रिया: बैठक के दौरान शिक्षकों की नियुक्ति तिथि, पदोन्नति, क्रमोन्नति और सेवा काल के 12, 24, 30 व 35 वर्ष पूरे होने के दावों का मिलान उनकी सर्विस बुक से किया जाएगा।

  • समयसीमा में निस्तारण: डीईओ कार्यालय का उद्देश्य इस पुनरीक्षण के माध्यम से योग्य शिक्षकों के समयमान और क्रमोन्नति संबंधी प्रस्तावों में आ रही तकनीकी त्रुटियों को दूर कर उनका समय पर निस्तारण करना है, ताकि किसी भी पात्र शिक्षक को उनके हक से वंचित न रहना पड़े।

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