मध्य प्रदेश के 10 गांवों में 72 घंटे से छाया अंधेरा, ओवरलोड ट्रांसफार्मर फुंकने से किसान परेशान
मध्य प्रदेश के डबरा क्षेत्र के 10 गांवों में ट्रांसफार्मर खराब होने से तीन दिनों से बिजली गुल है। किसानों की धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है।
भोपाल : मध्य प्रदेश के देवरा और गोबरा गाँव के लोगों को बीते 72 घंटों ने उस पुराने दौर में वापस धकेल दिया है, जब ग्रामीण इलाकों में दिन ढलने के साथ ही सुबह का इंतजार शुरू हो जाता था कि उजाला अब तभी लौटेगा। आज के इस आधुनिक दौर में एक बार फिर टॉर्च, मोमबत्ती और गाड़ियों की हेडलाइटें लोगों की जिंदगी का सहारा बन गई हैं।
खुद को 'सरप्लस बिजली स्टेट' (अतिरिक्त बिजली वाला राज्य) कहने वाले मध्य प्रदेश के इन 10 गाँवों में पिछले तीन दिनों से अंधेरा पसरा हुआ है। विडंबना यह है कि एक तरफ जहाँ राज्य में बिजली भरपूर होने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और सिस्टम की लापरवाही के कारण ये ग्रामीण इलाके घुप्प अंधेरे में डूबे हैं। इन तीन दिनों के दौरान बीसियों बार गुहार लगाने के बावजूद ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हुई और इन गाँवों में बत्ती गुल है। खास बात यह है कि राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का गृह क्षेत्र यहाँ से महज पचास किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है।
🌑 72 घंटों से घुप्प अंधेरे में डूबे हैं डबरा के 10 गाँव
अंधेरे में चेहरों को पहचान पाना भी मुश्किल हो रहा है। मुकाम बघेल, भीकम कुशवाहा, गंभीर बघेल, गोदन कुशवाह और बलराम कुशवाह—नाम भले ही अलग हों, लेकिन सभी की कहानी एक जैसी ही है। पूरे 72 घंटे बीत जाने के बाद भी इन इलाकों में बिजली बहाल नहीं हो पाई है।
मुकाम सिंह गोवरा का कहना है कि, "अंधेरे की वजह से छोटे बच्चों को संभालना बेहद मुश्किल हो गया है। बिजली कब तक आएगी, इसका भी कोई ठिकाना नहीं है।" भीकम कुशवाहा भी इसी गाँव में रहते हैं और वे भी इस विकट अंधेरे का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार बिजली विभाग से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। भीकम कहते हैं, "यह बारिश का मौसम है, ऐसे में अंधेरे में जहरीले जीवों और दुर्घटना का भारी डर बना रहता है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे छोटे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। समझ नहीं आता कि किससे कहें और कहाँ जाएँ, हमारी कोई सुनने वाला नहीं है।"
🌾 धान की रोपाई का सीजन, बर्बाद होने की कगार पर फसल
यह संकट केवल एक गोबरा गाँव तक सीमित नहीं है, बल्कि डबरा के देवरा, गोबरा, सैतोल, कोसा, जवाल, सिंहपुर, खेड़ी रायमल, मिलघन और छीमक जैसे लगभग 10 गाँवों में पिछले तीन दिनों से पूरी तरह बत्ती गुल है। वर्तमान में खरीफ सीजन चल रहा है और किसान अपने खेतों में धान की रोपाई कर रहे हैं, ऐसे में बिजली न होने के कारण इन किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
किसान बलराम कुशवाह बताते हैं, "यह समय धान की रोपाई का है। तीन दिनों से बिजली पूरी तरह बंद होने के कारण नलकूप नहीं चल पा रहे हैं और खेतों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है, जिसके चलते अब हमारी फसल सूखने और प्रभावित होने लगी है।" उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द ही बिजली सप्लाई चालू नहीं हुई, तो वे किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
⚡ क्षमता से अधिक लोड के कारण फुंका 33 केवी का ट्रांसफार्मर
आखिर इन 10 गाँवों में तीन दिन से अंधेरा क्यों छाया हुआ है, इसके पीछे तकनीकी लापरवाही सामने आई है। छीमक गाँव में 33 केवी क्षमता का मुख्य कृषि विद्युत ट्रांसफार्मर तीन दिन पहले खराब हो गया था। इस कृषि ट्रांसफार्मर की मूल क्षमता 5000 केवीए (KVA) थी, जबकि वर्तमान में उस पर लगभग 8000 केवीए का अत्यधिक लोड संचालित किया जा रहा था।
लगातार ओवरलोड बने रहने के कारण यह ट्रांसफार्मर पिछले साल भी खराब हुआ था और इस बार फिर से जवाब दे गया। जरूरत के मुताबिक क्षमता न बढ़ाए जाने का खामियाजा आज इन इलाकों के किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
🔄 बड़ा ट्रांसफार्मर लगाने की मांग पर अड़े हैं ग्रामीण और किसान
अब इन सभी गाँवों के किसान इस बात पर अड़े हैं कि केवल मरम्मत से काम नहीं चलेगा, बल्कि ट्रांसफार्मर को बदला जाना चाहिए। किसानों ने जोरदार मांग की है कि वर्तमान 5000 केवीए वाले ट्रांसफार्मर की जगह तत्काल 8000 केवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाए और बिजली आपूर्ति जल्द बहाल हो, ताकि भविष्य में बार-बार ऐसी गंभीर स्थिति उत्पन्न न हो।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के डीई विकास कुमार ने बताया कि, "किसानों की तरफ से आवेदन मिल चुका है। बारिश के मौसम में लाइटनिंग (आकाशीय बिजली) के कारण तकनीकी दिक्कत आई थी और पीटीआर (PTR) फेल हो गया है। नया पीटीआर आज ही आ रहा है और वैकल्पिक प्रबंध भी किए जा रहे हैं।" हालांकि, ग्रामीण भीकम का कहना है कि कुछ गाँवों में अगर बिजली आई भी, तो वह सिर्फ 'मुखड़े दिखाने जैसी' रही और दो घंटे के भीतर ही फिर गुल हो गई।
🏛️ ऊर्जा मंत्री के घर से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर है इलाका
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के गृह क्षेत्र से केवल पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आमतौर पर इस बात के लिए जाने जाते हैं कि वे मैदानी स्तर पर जाकर बिजली समस्याओं का खुद समाधान करते हैं, लेकिन इस बार तीन दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने इन अंधेरे में डूबे गाँवों की सुधि नहीं ली है, जिससे ग्रामीणों में प्रशासनिक तंत्र के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
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