भागवत गीता और उपनिषद से मिल रही बच्चों को शिक्षा; वृंदावन के आचार्य की पहल से बदल रही युवाओं की दिशा
आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच 'निमाई पाठशाला' दे रही है वैदिक और मानवीय मूल्यों की निशुल्क शिक्षा। भागवत गीता और उपनिषद के जरिए संवार रही युवाओं का भविष्य।
इंदौर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डिजिटल लत के बीच युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। करियर की अंधी दौड़ और प्रतिस्पर्धा के कारण बढ़ते तनाव को देखते हुए वृंदावन के आचार्य पुंडरीक गोस्वामी और उनकी पत्नी रेणुका पुंडरीक गोस्वामी ने वर्ष 2020 में 'निमाई पाठशाला' की स्थापना की। यह ऑनलाइन स्कूल आज न केवल बच्चों को बल्कि बड़ों को भी भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
📖 निमाई पाठशाला: भागवत गीता और उपनिषद से शिक्षा
इस पाठशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ वैदिक और मानवीय शिक्षा पूरी तरह से निशुल्क दी जाती है। इसमें शामिल होने के लिए कोई आयु, धर्म, जाति या लिंग का बंधन नहीं है। सप्ताह में 5 दिन, 1 घंटे की ऑनलाइन क्लास रेणुका पुंडरीक गोस्वामी द्वारा ली जाती है, जिसमें 5 वर्ष के बच्चों से लेकर 60 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक तक शामिल हो सकते हैं। कीर्तन, भक्तिगीत, प्रभात फेरी और संस्कृत की कक्षाओं के माध्यम से छात्र अध्यात्म के गहरे ज्ञान से रूबरू होते हैं।
💡 शिक्षा और विज्ञान का संगम
निमाई पाठशाला से जुड़ी डॉ. जूही सिकरवार का कहना है कि हमारे प्राचीन शास्त्रों में वे खगोलीय और वैज्ञानिक तथ्य सदियों पहले ही दर्ज थे, जिन्हें आज का आधुनिक विज्ञान अपनी नई खोज बता रहा है। पाठशाला का मानना है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल आजीविका कमाने (नौकर बनाने) में सक्षम हो सकती है, लेकिन भारतीय परंपरा और नैतिक मूल्य केवल हमारे शास्त्रों के अध्ययन से ही प्राप्त हो सकते हैं। रेणुका पुंडरीक गोस्वामी स्वयं छात्रों के साथ संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करती हैं, जिससे यह पाठशाला मात्र एक स्कूल न रहकर एक घनिष्ठ आध्यात्मिक समुदाय बन गई है।
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