एमपी में महंगी हो सकती है बिजली, ट्रांसमिशन लॉस बढ़ने से आम जनता पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
मध्य प्रदेश में बिजली कंपनियां ट्रांसमिशन और लाइन लॉस को 14% से बढ़ाकर 24% करने की मांग कर रही हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 से 15% की बढ़ोतरी हो सकती है।
मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही एक बड़ा झटका लग सकता है। प्रदेश की बिजली कंपनियों ने बिजली के दाम बढ़ाने के लिए विद्युत नियामक आयोग के समक्ष नई टैरिफ पिटीशन दाखिल की है। हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनियां अब ट्रांसमिशन और लाइन लॉस के मानक को जो पहले 14 प्रतिशत माना जाता था, उसे बढ़ाकर 24 प्रतिशत करने की मांग कर रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि बिजली कंपनियां अपनी विफलता और बिजली चोरी को रोकने में असमर्थता का पूरा वित्तीय बोझ अब आम और ईमानदार उपभोक्ताओं की जेब पर डालने जा रही हैं।
💰 क्या है 25 प्रतिशत बिजली के नुकसान का गणित और आरडीएसएस (RDSS) योजना?
बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि जब कंपनियां 100% बिजली की सप्लाई करती हैं, तो उन्हें केवल 75% बिजली का ही राजस्व मिल पाता है। शेष 25% बिजली या तो ट्रांसमिशन के दौरान नष्ट हो जाती है या फिर बड़े पैमाने पर होने वाली बिजली चोरी की भेंट चढ़ जाती है। इस नुकसान को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर मध्य प्रदेश में लगभग 18,649 करोड़ रुपये की 'रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) शुरू की थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने और ट्रांसफार्मर अपग्रेड करने का काम किया जा रहा है, ताकि लाइन लॉस को कम किया जा सके।
📉 करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी नहीं सुधरे हालात, ईमानदार उपभोक्ताओं को भुगतना होगा खामियाजा
विद्युत नियामक आयोग की वेबसाइट पर प्रकाशित टैरिफ पिटीशन से यह खुलासा हुआ है कि करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी डिस्ट्रीब्यूशन और लाइन लॉस को मानक स्तर 14% तक नहीं लाया जा सका है। जबलपुर के जाने-माने बिजली विशेषज्ञ और रिटायर्ड इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि आज भी राज्य में यह लॉस 24% तक बना हुआ है। चूंकि कंपनियां इसे नियंत्रित करने में नाकाम साबित हुई हैं, इसलिए उन्होंने आगामी वर्षों के लिए इसे ही मानक बनाने की मांग कर दी है। इसका परिणाम यह होगा कि आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 से 15% तक की भारी बढ़ोतरी तय है, जो कि समय पर बिल चुकाने वाले ईमानदार नागरिकों के साथ सरासर अन्याय है।
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