दुष्कर्म के बाद शादी और एफआईआर रद्द करने के मामले पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आपसी सहमति से याचिका मंजूर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिवनी के एक दुष्कर्म मामले में एफआईआर रद्द कर दी है। आरोपी और पीड़िता ने आपसी समझौते के बाद शादी कर ली थी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दुष्कर्म के बाद शादी किए जाने और एफआईआर रद्द करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई हुई। इस मामले में पीड़िता ने स्वयं एफआईआर निरस्त किए जाने को लेकर हाईकोर्ट में आवेदन दिया था। पीड़िता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है और उन्होंने विधिवत विवाह भी कर लिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ द्वारा की गई, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों के वैवाहिक जीवन को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है।
🏛️ क्या था पूरा मामला? सिवनी जिले से जुड़ा है विवाद
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले का है। यहाँ के धनौरा थाने में एक युवती द्वारा एक युवक के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके समर्थन में पीड़िता ने भी आवेदन पेश कर एफआईआर को निरस्त करने का अनुरोध किया। पीड़िता का कहना था कि उन्होंने 28 अप्रैल 2026 को आपसी सहमति से विवाह कर लिया है और वे वर्तमान में पति-पत्नी के रूप में शांतिपूर्वक जीवन बिता रहे हैं। पीड़िता के वकील ने दलील दी कि अब इस आपराधिक कार्यवाही को आगे जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
📝 हाईकोर्ट ने माना- कार्यवाही जारी रखना वैवाहिक जीवन में खलल डालने जैसा होगा
सभी पक्षों की दलीलें और दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एफआईआर के तथ्यों से यह स्पष्ट है कि दोनों पक्ष पहले से परिचित थे और अब उन्होंने स्वेच्छा से शादी कर ली है। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता अपनी मर्जी से समझौता कर चुकी है और वह आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहती है। ऐसे में, यदि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही को जारी रखा गया, तो इससे दोनों के नव-स्थापित व्यवस्थित वैवाहिक जीवन में अनावश्यक रूप से खलल पड़ेगा। इसे ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है।
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