भोपाल में डीएमएस को केंद्रीय विद्यालय में मर्ज करने के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र, 'सेव डीएमएस' की मांग
भोपाल के डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल (DMS) को KVS में शामिल करने के विरोध में छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किया है। जानिए पूरा मामला।
राजधानी भोपाल में डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल (DMS) रीजनल स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में शामिल किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। इस फैसले के विरोध में सैकड़ों छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और हाथों में 'सेव DMS' जैसे तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल की मूल शैक्षणिक पहचान को बरकरार रखने की मांग करते हुए रीजनल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसके गुप्ता को एक ज्ञापन भी सौंपा।
🚫 DMS को KVS में मिलाने पर छिड़ा विवाद, जेन अल्फा ने किया अनोखा प्रदर्शन
भोपाल में पहली बार 'जेन अल्फा' के बैनर तले इस तरह का कड़ा विरोध प्रदर्शन दर्ज किया गया है। छात्रों का साफ कहना है कि DMS का KVS में संविलयन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे स्कूल के सामने चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज करेंगे। छात्रों और अभिभावकों का तर्क है कि DMS कोई सामान्य स्कूल नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और प्रायोगिक कार्यों के लिए अपनी एक विशेष पहचान रखता है।
📉 खो जाएगी स्कूल की असली पहचान, एडमिशन पॉलिसी और भविष्य को लेकर चिंता
एनसीईआरटी के अंतर्गत भोपाल के अलावा अजमेर, मैसूर और भुवनेश्वर में ऐसे चार क्षेत्रीय विद्यालय संचालित होते हैं, जो शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नए प्रयोग करते हैं। अभिभावकों का कहना है कि KVS में मर्जर होने से इन संस्थानों का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा। इसके अलावा, केंद्रीय विद्यालयों की प्रवेश प्राथमिकता नीतियों और नर्सरी से 12वीं तक पढ़ने वाले करीब 1000 विद्यार्थियों के भविष्य, वोकेशनल कोर्सेज और शिक्षकों की व्यवस्था को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
🗣️ कांग्रेस ने बताया 'अलार्मिंग सिचुएशन', सरकार से पुनर्विचार की मांग
इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने इस छात्र प्रदर्शन को राजधानी का पहला 'जेन अल्फा प्रोटेस्ट' करार देते हुए इसे एक गंभीर संकेत बताया है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि DMS के KVS में संविलयन के इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए, ताकि देश के इन चुनिंदा प्रायोगिक विद्यालयों की ऐतिहासिक और शैक्षणिक पहचान सुरक्षित रह सके।
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