पेट्रोल-सब्जी के बाद शक्कर के दामों में लगी आग, 70 रुपये किलो तक पहुंच सकते हैं भाव
भोपाल में शक्कर की कीमतों में भारी उछाल आया है। थोक भाव 67 रुपये और खुदरा 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की आशंका है। व्यापारियों ने जमाखोरी की जांच की मांग की है।
देश भर में लगातार महंगाई बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर, सब्जी फल से लेकर अनाज के दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई की इस लिस्ट में एक नाम और जुड़ गया है शक्कर का। शक्कर के भाव में जारी तेजी की वजह से जहां कारोबारियों की चिंता बढ़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ आम उपभोक्ता की रसोई और होटलों का बजट भी बिगड़ रहा है। भोपाल में थोक भाव 66 से 67 रुपये किलो के पार पहुंच गए हैं। बाजार में तेजी का सिलसिला नहीं थमा तो खुदरा कीमत 70 रुपये किलो तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि कीमत बढ़ने के पीछे मांग-सप्लाई के साथ बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी की गतिविधियों की भी जांच जरूरी है।
🚜 देश में 5 करोड़ किसान करते हैं गन्ने की खेती, महाराष्ट्र चीनी उत्पादन में सबसे आगे
बता दें कि, भारत का दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग शुगर मिल है। देश भर में 5 करोड़ किसान गन्ने की खेती करते हैं। हर साल 55 से 60 लाख रकबे में गन्ने की खेती की जाती है। 2023-24 में देश में कुल 534 चीनी मिलें चालू थीं। इनमें 195 सहकारिता, 328 निजी और 11 सार्वजनिक क्षेत्र की हैं। चीनी के उत्पादन में महाराष्ट्र सबसे आगे है। यहां 99.3 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है। देश में चीनी की सालाना खपत लगभग 280-284 लाख मीट्रिक टन होती है।
🕵️♂️ माल की कमी नहीं, फिर भी बढ़ रहे दाम: व्यापारियों ने उठाई जमाखोरी और सट्टेबाजी की जांच की मांग
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के अनुसार, ''बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तविक स्टाक और मिलों से हो रही आपूर्ति के बावजूद शक्कर के भाव लगातार क्यों बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कहीं बड़ी मात्रा में माल रोककर बाद में अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश हो रही है तो इससे थोड़े समय के लिए बाजार में तेजी पैदा हो सकती है।'' उनका कहना है कि सरकार को चीनी मिलों से लेकर बड़े स्टाकिस्ट, थोक मंडियों और बड़े कारोबारियों तक उपलब्ध स्टाक की जांच करनी चाहिए ताकि असामान्य कारोबार का पता लगाया जा सके। सट्टेबाजी बढ़ी तो ईमानदार कारोबारी भी फंसेंगे और उपभोक्ता को उचित कीमत पर माल उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा।
⚖️ अगस्त 2026 की स्टॉक सीमा लागू, सरकार की नजर के बावजूद आम आदमी की जेब पर पड़ रहा भारी असर
शक्कर व्यापारियों का कहना है कि, केंद्र सरकार शक्कर की कीमतों और उपलब्धता को नियंत्रित करने के लिए चीनी मिलों पर महीनेवार स्टाक रखने की सीमा लागू करती रही है। अगस्त 2026 के लिए भी चीनी मिलवार स्टाक सीमा का आदेश जारी किया गया है, फिर भी बाजार में शक्कर महंगी है। किराना व्यापारी सुधीर पांड्या बताते हैं कि, ''भोपाल में थोक भाव 66-67 रुपये किलो के पार जाने के बाद खुदरा बाजार पर भी दबाव बढ़ गया है। यदि थोक कीमतों में तेजी जारी रहती है तो खुदरा भाव 70 रुपये किलो तक पहुंचने की आशंका है।'' व्यापारियों ने सलाह दी है कि उपभोक्ताओं और दुकानदारों को घबराकर जरूरत से ज्यादा शक्कर का स्टॉक नहीं करना चाहिए।
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