सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इजराइल का बड़ा हमला, तुर्की के साथ गहराया भू-राजनीतिक तनाव

सीरिया में एयरबेस पर इजराइल के हमलों के बाद इजराइल और तुर्की के बीच तनाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे तुर्की के लिए चेतावनी बताया है।

Aug 22, 2026 - 17:58
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सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इजराइल का बड़ा हमला, तुर्की के साथ गहराया भू-राजनीतिक तनाव

इजराइल और तुर्की के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इस बढ़ते तनाव की मुख्य वजह सीरिया के उत्तर-पश्चिमी इदलिब प्रांत में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'अबू अल-दुहूर एयरबेस' पर इजराइल द्वारा किए गए ताबड़तोड़ हवाई हमले हैं। हाल ही में इजराइल ने इस एयरबेस को निशाना बनाते हुए आठ हवाई हमले किए। खास बात यह है कि यह एयरबेस तुर्की की सीमा से महज 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुलकर इसे तुर्की के लिए एक स्पष्ट चेतावनी करार दिया है, जिससे मध्य पूर्व में एक बार फिर बड़े संघर्ष की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

🛑 सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी को इजराइल ने बताया अपनी सुरक्षा के लिए खतरा

नेतन्याहू के कार्यालय से जारी बयानों के अनुसार, पूर्व में इजराइल और सीरिया के बीच सुरक्षा मामलों को लेकर एक निश्चित स्थिति और बफर जोन बनाए रखने पर सहमति बनी थी। हालांकि, इजराइल का गंभीर आरोप है कि सीरिया इस व्यवस्था को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गया था, क्योंकि उसने तुर्की के सैनिकों और सैन्य सलाहकारों को उक्त एयरबेस पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की अनुमति दे दी थी। इजराइल ने पहले ही सीरिया को आगाह किया था कि उस एयरबेस पर तुर्की की कोई भी सैन्य मौजूदगी सीधे तौर पर इजराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनेगी। हमलों के तुरंत बाद नेतन्याहू ने दो टूक शब्दों में कहा कि इजराइल सीरियाई क्षेत्र में तुर्की का ऐसा कोई भी सैन्य जमावड़ा कतई बर्दाश्त नहीं करेगा, जो उनकी सीमाओं के नजदीक आकर खतरा पैदा करे। हालांकि, तुर्की और सीरिया दोनों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वहां कोई स्थायी सैन्य तैनाती की योजना नहीं थी, बल्कि तुर्की के अधिकारी केवल ट्रेनिंग और सैन्य सहयोग के सिलसिले में वहां गए थे।

⚡ सीधे सैन्य टकराव का खतरा और सीरिया में बदलता शक्ति संतुलन

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इजराइल ने इन हवाई हमलों से पहले तुर्की को किसी भी तरह की पूर्व सूचना नहीं दी थी। अमेरिका के सीरिया-इराक विशेष दूत और तुर्की में राजदूत टॉम बैरक के अनुसार, तुर्की की सेना ने अपने क्षेत्र के पास इजराइली लड़ाकू विमानों की आवाजाही को भांप लिया था, जिससे यह अंदेशा पैदा हो गया था कि तुर्की इस पर तत्काल जवाबी कार्रवाई कर सकता है। साल 2015 में तुर्की द्वारा सीरियाई सीमा के पास एक रूसी लड़ाकू विमान को मार गिराए जाने की घटना को याद करते हुए विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसी बिना सूचना वाली सैन्य कार्रवाइयों से दोनों देशों की सेनाएं गलती से आमने-सामने आ सकती हैं।

दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार के पतन और अहमद अल-शरा के राष्ट्रपति बनने के बाद से सीरिया का राजनीतिक और सैन्य समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। तुर्की के नई सीरियाई सरकार के साथ बेहद करीबी संबंध हैं और वह लगातार वहां की सेना को प्रशिक्षित कर रहा है, जबकि इजराइल ने भी देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में अपनी सैन्य पकड़ मजबूत कर ली है। फिलहाल दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की संभावना कम है, लेकिन गलत अनुमान और बढ़ते प्रभाव की होड़ किसी भी छोटी घटना को बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है।

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