नीमच में मुस्लिम युवाओं ने पेश की भाईचारे की मिसाल, हिंदू रीति-रिवाज से किया बेसहारा बुजुर्ग का अंतिम संस्कार
नीमच में बेसहारा बुजुर्ग की मौत के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आगे आकर हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया। भाईचारे की इस मिसाल की हर तरफ तारीफ हो रही है।
अंग्रेजी की एक पुरानी और मशहूर कहावत है कि इंसानियत से बड़ा इस दुनिया में कोई दूसरा धर्म नहीं होता। इस बात को मध्य प्रदेश के नीमच जिले में कुछ संवेदनशील लोगों ने पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आगे बढ़कर आपसी भाईचारे और इंसानियत की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है, जिसकी सराहना अब पूरे शहर और क्षेत्र में हो रही है। शहर के कुछ मुस्लिम युवाओं ने एक बेसहारा बुजुर्ग के निधन के बाद आगे आकर उनका हिंदू रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया।
🚶♂️ फुटपाथ पर मिला 60 वर्षीय बुजुर्ग का शव, स्कीम नंबर 9 के रहने वाले थे सुरेंद्र सिंह ठाकुर
शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख फव्वारा चौक पर शुक्रवार के दिन उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां फुटपाथ पर एक 60 वर्षीय बुजुर्ग अचेत अवस्था में मृत पाए गए। घटना की सूचना मिलते ही केंट थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान स्कीम नंबर 9 के निवासी सुरेंद्र सिंह ठाकुर के रूप में हुई। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि बुजुर्ग का दुनिया में कोई परिवार नहीं था और वे पूरी तरह अकेले थे। ऐसे दुखद और लाचारी के मोड़ पर जब बुजुर्ग को कोई भी सहारा देने वाला नहीं दिखा, तब शहर के मुस्लिम समुदाय के लोग मसीहा बनकर सामने आए।
💰 दुकान मालिक अब्दुल जब्बार ने उठाया खर्च, मानव अधिकार मंच के कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्था
मृतक सुरेंद्र सिंह जिस दुकान पर काम किया करते थे, उस दुकान के मालिक अब्दुल जब्बार को जैसे ही उनके निधन की दुखद सूचना मिली, वे तुरंत बिना एक पल गंवाए आगे आए। उन्होंने बुजुर्ग के अंतिम संस्कार का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। इसके बाद मानव अधिकार मंच के जिलाध्यक्ष भूरा कुरैशी और उनके अन्य साथियों ने मिलकर अंतिम संस्कार की तमाम व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभाला। अगले दिन शनिवार को बुजुर्ग के पार्थिव शरीर को पूरी श्रद्धा के साथ हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार अंतिम यात्रा के लिए तैयार किया गया और श्मशान घाट तक पहुंचाया गया।
🤲 मुस्लिम युवाओं ने दिया कंधा, बहन और बहनोई भी श्मशान घाट पहुंचे
घटना की खबर मिलने पर दुलाखेड़ा में रहने वाली मृतक की बहन और बहनोई को भी सूचना दी गई, जो सीधे श्मशान घाट पहुंचे। इस अंतिम यात्रा में शोएब कुरैशी, आबिद कुरैशी, सद्दाम पठान, मलिक कुरैशी, इम्तियाज कुरैशी, शाहिद भाई और जाकिर भाई समेत कई स्थानीय मुस्लिम युवा शामिल हुए और दिवंगत आत्मा को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत का नाता सभी धर्मों से ऊपर होता है।
🍂 मजदूरी कर बसर करते थे जिंदगी, अकेलापन बन चुका था उनका सच
अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद रहे बुजुर्ग सुरेंद्र सिंह के साले ने भावुक होकर बताया कि उनके परिवार में अब कोई नहीं बचा था। वे फव्वारा चौक के आसपास ही छोटी-मोटी मजदूरी करके अपना गुजारा करते थे और रात के वक्त वहीं किसी फुटपाथ पर सो जाया करते थे। अकेलापन ही उनकी जिंदगी की सच्चाई बन गया था, लेकिन उनकी विदाई ने यह दिखा दिया कि भले ही दुनिया में उनका कोई अपना न हो, लेकिन इंसानियत अभी भी जिंदा है।
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