जेईसी के छात्रों को गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के सीनियर्स देंगे ट्रेनिंग, 'टेक ब्लिट्ज़ 2.0' का आयोजन
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की कॉसमॉस सोसायटी 'टेक ब्लिट्ज़ 2.0' का आयोजन कर रही है। इसमें गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों में काम कर रहे सीनियर छात्रों को ट्रेनिंग देंगे।
मध्य प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (JEC) के छात्रों के लिए एक बेहतरीन तकनीकी अवसर सामने आया है। कॉलेज की कॉसमॉस सोसायटी द्वारा 'टेक ब्लिट्ज़ 2.0' का भव्य ऑनलाइन आयोजन किया जा रहा है। दो सप्ताह तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम में कॉलेज के कई ऐसे पूर्व छात्र जुड़ेंगे जो वर्तमान में गूगल, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी दुनिया की शीर्ष तकनीकी कंपनियों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। ये सभी अनुभवी प्रोफेशनल्स इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग (ML), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ उनके वास्तविक दुनिया (रियल वर्ल्ड) में होने वाले व्यावहारिक इस्तेमाल की बारीकियां सिखाएंगे। इस आयोजन में देश के प्रमुख संस्थानों जैसे आईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT), एमएनआईटी (MNIT) और डीएवीवी (DAVV) की छात्र सोसाइटियों को भी जोड़ा गया है।
🏛️ कॉसमॉस सोसायटी की अनूठी पहल, एकेडमिक एक्टिविटीज के जरिए छात्रों में विकसित हो रहा साइंटिफिक टेंपरामेंट
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज मध्य प्रदेश का अग्रणी और सबसे पुराना इंजीनियरिंग संस्थान है। इस कॉलेज में सक्रिय 'कॉसमॉस' नाम की छात्र सोसायटी सालभर विभिन्न प्रकार की एकेडमिक एक्टिविटीज संचालित करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य युवा इंजीनियरों के भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण (साइंटिफिक टेंपरामेंट) को मजबूत करना है। इसी कड़ी में सोसायटी के सदस्य इस बार इस बड़े तकनीकी कार्यक्रम को ऑनलाइन माध्यम से और अधिक व्यापक रूप में आयोजित कर रहे हैं, जिससे प्रदेश और देश के विभिन्न संस्थानों के हजारों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिल सके।
🌐 हजारों छात्रों को मिलेगा फायदा, सिलेबस से परे फील्ड की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू होंगे युवा
समिति के सदस्य ध्रुव शुक्ल ने बताया कि यह आयोजन पहले भी किया जा चुका है, लेकिन इस बार इसका दायरा काफी बड़ा है। इसमें कई प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों और उनकी सोसाइटियों को जोड़ा गया है, जिससे 10 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्र सीधे जुड़ेंगे। वहीं, कंप्यूटर साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जेएस ठाकुर ने कहा कि कॉलेज की पढ़ाई में सिलेबस और प्रैक्टिकल की जानकारी तो मिलती है, लेकिन फील्ड पर रोजाना बदल रही तकनीक और वास्तविक समस्याओं का सामना करने का अनुभव केवल वही लोग दे सकते हैं जो इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। यही वजह है कि पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच इस पुल का निर्माण किया गया है।
🤖 मशीन लर्निंग और एआई का मिलेगा ज्ञान, सीनियर इंजीनियर्स साझा करेंगे अपने अनुभव
कॉसमॉस सोसायटी के एक अन्य सदस्य आकाश शर्मा ने बताया कि देश-दुनिया में कार्यरत कई पूर्व छात्रों से संपर्क कर एक विस्तृत शेड्यूल तैयार किया गया है। दो सप्ताह तक चलने वाले इन सेशन में सीनियर इंजीनियर छात्रों को आधुनिक तकनीक के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराएंगे। इस पहल से उत्साहित इंजीनियरिंग की छात्रा धनश्री ने कहा किताबी ज्ञान को असल जिंदगी में कैसे लागू करना है, यह हमें हमारे वही सीनियर सिखा सकते हैं जो खुद इस फील्ड में महारत रखते हैं, और यह आयोजन इसके लिए एक आदर्श मंच साबित होगा।
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