रियल एस्टेट कारोबारी संदीप नागर आत्महत्या मामले में पुलिस जांच तेज, मोबाइल का लॉक खुलवाने का प्रयास जारी
इंदौर के साकेत नगर में आत्महत्या करने वाले रियल एस्टेट कारोबारी संदीप नागर के मामले में पुलिस जांच कर रही है। परिजनों ने कर्ज से इनकार किया है।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के साकेत नगर स्थित अपने दफ्तर में संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या करने वाले रियल एस्टेट कारोबारी संदीप उर्फ बंटी नागर के बेटे और भाई बुधवार को सामान्य कथन दर्ज कराने के लिए पलासिया थाने पहुंचे थे। परिजनों ने पुलिस के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि इस आत्महत्या के पीछे किसी भी तरह के कर्ज या आर्थिक तंगी की कोई बात नहीं है। थाने में लंबी बातचीत के बाद वे वहां से लौट आए। वहीं, दूसरी ओर पुलिस ने घटना से ठीक पहले किन-किन नंबरों पर बातचीत हुई थी, इसकी विस्तृत कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाल ली है और उन सभी नंबरों से जुड़े लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया जाएगा। हालांकि, मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण पुलिस अभी नामों का खुलासा करने से बच रही है और मोबाइल विशेषज्ञों की मदद से फोन का लॉक खुलवाने का प्रयास कर रही है।
⏱️ थाने में एक घंटे से अधिक समय तक रहे परिजन, ऑफिस स्टाफ के बयानों से भी आर्थिक संकट की बात हुई खारिज
पलासिया थाने पहुंचे बंटी नागर के बेटे और भाई ने टीआई सुरेंद्र सिंह से करीब एक घंटे से अधिक समय तक चर्चा की, हालांकि वे मोबाइल के लॉक को लेकर कोई विशेष जानकारी नहीं दे सके। पुलिस इससे पहले उनके ऑफिस स्टाफ के भी बयान दर्ज कर चुकी है। स्टाफ ने पूछताछ में बताया कि उनके सभी रियल प्रोजेक्ट समय पर और बेहद सुचारू रूप से चल रहे थे। कारोबार में किसी भी प्रकार की आर्थिक बाधा या संकट नहीं था और ऑफिस में उनका व्यवहार भी पूरी तरह संतुलित व सामान्य था। वे रोजाना ग्राहकों और प्रोजेक्ट के सिलसिले में लोगों से मिलते थे, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि मामला वित्तीय नहीं बल्कि किसी अन्य निजी कारण से जुड़ा हो सकता है।
💰 हाल ही में खरीदी थी करोड़ों की जमीन, बैंक बैलेंस भी था मजबूत और सभी प्रोजेक्ट्स को मिल चुकी थी जरूरी क्लीयरेंस
जांच में यह बात भी सामने आई है कि बंटी नागर हाल ही में दिल्ली से लौटे थे और पिछले कुछ दिनों से उन्होंने अपने दोस्तों से बातचीत लगभग बंद कर दी थी। जिन दोस्तों से रोज पांच से दस बार बात होती थी, उनके कॉल उठाना भी उन्होंने बंद कर दिया था। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात साफ हुई है कि उन्हें कोई आर्थिक परेशानी नहीं थी, क्योंकि इसी महीने उन्होंने सांवेर तहसील में करोड़ों रुपये की जमीन की रजिस्ट्री कराई थी और उनका बैंक बैलेंस भी काफी मजबूत स्थिति में था। उनके कुल पांच प्रोजेक्ट चल रहे थे, जिनकी सभी क्लीयरेंस कॉलोनी सेल इंदौर से हो चुकी थी। एक प्रोजेक्ट की कार्यपूर्णता हाल ही में ली गई थी, चार की विकास मंजूरियां पहले से थीं और एक अन्य प्रोजेक्ट की फाइल कलेक्ट्रेट में प्रक्रियाधीन थी।
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