ओबेदुल्लागंज वन मंडल के चिलवाहा परिक्षेत्र में दहशत, भोपाल एम्स में इलाज जारी
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में चलती बाइक पर बैठे बुजुर्ग पर बाघ ने हमला कर दिया है। गंभीर हालत में उन्हें भोपाल एम्स रेफर किया गया है।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बाघों की बढ़ती चहलकदमी अब इंसानी जिंदगियों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। शुक्रवार को ओबेदुल्लागंज वन मंडल के चिलवाहा परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम बड़कोई में एक दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां इलाज कराकर लौट रहे एक बुजुर्ग पर रास्ते में घात लगाए बैठे टाइगर ने चलती बाइक पर ही हमला बोल दिया। इस अचानक हुए खूंखार हमले में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद नाजुक हालत में भोपाल एम्स रेफर कर दिया गया है।
🏍️ दवा लेकर घर लौट रहे थे बुजुर्ग: पोते ने सुनाई आपबीती, वन विभाग ने इलाज का उठाया पूरा खर्च
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बड़कोई निवासी बिना सिंह रायसेन जिला मुख्यालय से अपनी दवाइयां लेकर परिजन के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। जब वे गांव के पास कच्चे रास्ते से गुजर रहे थे, तभी झाड़ियों में छिपे टाइगर ने पीछे बैठे बिना सिंह पर छलांग लगा दी। उनके पोते भारत सिंह ने बताया कि मौके पर पहुंचकर उन्होंने लहूलुहान हालत में दादाजी को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर स्थिति के चलते एम्स भोपाल रेफर कर दिया गया। उधर, चिलवाहा रेंजर शशांक तिवारी ने बताया कि पगमार्क की जांच की जा रही है कि हमला टाइगर ने किया या तेंदुए ने, तथा विभाग घायल के इलाज का पूरा खर्च उठा रहा है।
🌳 100 से अधिक बाघों का गढ़ बना रायसेन: ग्रामीणों में भारी रोष, सुरक्षा उपायों को लेकर उठे सवाल
बता दें कि रायसेन जिले में रातापानी टाइगर रिजर्व और सिंगोरी अभयारण्य का क्षेत्र आता है, जहां बाघों की संख्या 100 से अधिक पहुंच चुकी है। वनों और बाघों का यह कुनबा लगातार बढ़ने के कारण अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के दावों के बावजूद जंगलों के आसपास सुरक्षा और फेंसिंग के पुख्ता इंतजाम न होने से लोगों का निकलना दूभर हो गया है। करीब दो साल पहले भी नीमखेड़ा गांव में एक बुजुर्ग की बाघ के हमले में जान जा चुकी है।
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