पीबीएम पॉलीटैक्स लिमिटेड मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, श्रम न्यायालय में चलेगा प्रकरण
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला। श्रम आयुक्त को न्यायनिर्णायक शक्तियां प्राप्त नहीं हैं। हाईकोर्ट ने मामले को श्रम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के दिए निर्देश।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि श्रम आयुक्त (लेबर कमिश्नर) को न्यायनिर्णायक प्राधिकारी (ज्यूडिशियल पावर) की शक्तियां प्राप्त नहीं हैं, बल्कि उनकी भूमिका केवल विवाद को संदर्भित करने वाले प्राधिकारी की होती है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने लेबर कमिश्नर के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इसके साथ ही अदालत ने विवादित प्रकरण को श्रम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।
🏛️ पीबीएम पॉलीटैक्स लिमिटेड मामले में हाईकोर्ट की दो टूक: श्रम न्यायालय स्वतंत्र रूप से तय करेगा समय-सीमा का मुद्दा
मामले के अनुसार, मेसर्स पीबीएम पॉलीटैक्स लिमिटेड की ओर से 29 जनवरी 2020 को तत्कालीन अतिरिक्त श्रम आयुक्त, इंदौर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। कंपनी की मुख्य आपत्ति थी कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा के तहत तय समय-सीमा पर विचार किए बिना ही मामले को श्रम न्यायालय के पास भेजा गया था। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि श्रम आयुक्त विवाद के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय नहीं दे सकते, इसलिए उनका मामले को लेबर कोर्ट भेजना सही था। अदालत ने छिंदवाड़ा स्थित श्रम न्यायालय को निर्देश दिए हैं कि वह मामले के तथ्यों और समय-सीमा से जुड़े प्रश्नों पर स्वतंत्र रूप से विचार कर उचित आदेश पारित करे।
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