फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं देश के 39% लोग, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन युक्तांश पांडे ने बताए बचाव के उपाय
भारत में 38 से 39 प्रतिशत लोग फैटी लिवर की समस्या से परेशान हैं। खराब खानपान और जीवनशैली के कारण लिवर फेल होने के मामलों और ट्रांसप्लांट पर विशेष रिपोर्ट।
इंदौर। शारीरिक सक्रियता की कमी और खानपान में पोषक तत्वों की भारी कमी के चलते देश में फैटी लिवर की बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। वर्तमान में भारत की लगभग 38 से 39 प्रतिशत आबादी इस गंभीर समस्या से जूझ रही है। आराम तलब जीवनशैली, आहार में प्रोटीन की कमी और कार्बोहाइड्रेट की अधिकता के कारण मानव शरीर में लिवर पर असामान्य रूप से फैट जमने लगता है। इसके अलावा मोटापा, बढ़ा हुआ लिपिड प्रोफाइल और डायबिटीज लिवर के लिए सबसे घातक साबित हो रहे हैं। हर साल लिवर फेल हो जाने के कारण 2 लाख से अधिक लोगों की जान चली जाती है, हालांकि अब एडवांस मेडिकल तकनीक और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी इन मरीजों के लिए जीवनदान साबित हो रही है।
🔬 ग्रेड 3 के बाद बढ़ जाता है सिरोसिस का खतरा: समय पर ट्रांसप्लांट से 90% तक सफल रहती है सर्जरी
ख्यात लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. युक्तांश पांडे के अनुसार, उनके पास आने वाले मरीजों में अधिकांश ग्रेड 1 और ग्रेड 2 फैटी लिवर की स्थिति में होते हैं, लेकिन ग्रेड 3 के बाद मामला सिरोसिस के गंभीर खतरे तक पहुंच जाता है। लिवर खराब होने की मुख्य वजह केवल अत्यधिक मदिरापान ही नहीं, बल्कि खराब खानपान और सुस्त जीवनशैली भी है। राहत की बात यह है कि समय रहते यदि डोनर मिल जाए, तो लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी 90% तक पूरी तरह सफल होती है। डोनेशन के कुछ ही महीनों के भीतर डोनर के शरीर में भी लिवर का 80% हिस्सा दोबारा विकसित हो जाता है। लगातार थकान, पैरों में सूजन, पेट में पानी भरना और खून की उल्टी होना फैटी लिवर के प्रमुख लक्षण हैं, ऐसे में समय पर डॉक्टर से जांच कराकर हेपेटाइटिस बी के टीके लगवाना और बीएमआई नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
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