उज्जैन में एलिवेटेड फ्लाईओवर निर्माण की जद में आई 100 साल पुरानी मस्जिद, नगर निगम ने थमाया नोटिस
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच एलिवेटेड फ्लाईओवर मार्ग में आ रही 100 साल पुरानी फलादिया मस्जिद को नगर निगम ने नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे हैं। पढ़ें पूरी खबर।
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर सड़क चौड़ीकरण और एलिवेटेड फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा है। मास्टर प्लान के अंतर्गत शहर के भीतर लगभग 500 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण किया जाना प्रस्तावित है।
इसी क्रम में शहर के नई सड़क स्थित एटलस चौराहे के समीप प्रस्तावित एलिवेटेड फ्लाईओवर परियोजना के मार्ग में बनी एक और मस्जिद के प्रभावित होने की आशंका सामने आई है।
📜 नगर निगम ने मस्जिद फलादिया भूरा भाई को नोटिस जारी कर मांगे दस्तावेज
उज्जैन नगर निगम के भवन अधिकारी (जोन नं. 3) राजकुमार राठौर की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस के माध्यम से मस्जिद से जुड़े पक्ष को 27 अक्टूबर को दस्तावेजों के साथ सुनवाई के लिए बुलाया गया था।
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परियोजना का विवरण: निकास चौराहे से इंदौर गेट तक 2-लेन एलिवेटेड फ्लाईओवर का निर्माण होना है, जिसमें 16 मीटर चौड़ाई और 14 मीटर गहराई (कुल 224 वर्ग मीटर क्षेत्र) प्रभावित हो रहा है।
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निगम की चेतावनी: नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि यदि तय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो नियमों के तहत एकपक्षीय कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल अधिकारियों द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
🤝 मस्जिद समिति और स्थानीय दुकानदारों का पक्ष
मस्जिद समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, यह मस्जिद लगभग 100 वर्ष पुरानी है और इसका नक्शा वर्ष 1936 में स्वीकृत हुआ था। समिति नगर निगम के समक्ष सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करवा रही है। आगे के कदम पर अंतिम निर्णय शहर काजी द्वारा लिया जाएगा, जो सभी के लिए सर्वमान्य होगा।
दूसरी ओर, मस्जिद परिसर के बाहर पिछले 60 से 70 वर्षों से व्यापार कर रहे स्थानीय दुकानदारों में गहरी चिंता है।
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लेथ मशीन व्यापारी मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि उनकी दुकान पिछले 65 सालों से यहाँ स्थित है।
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पंचर व वेल्डिंग का काम करने वाले मोहम्मद एजाज और मोहम्मद इरशाद ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर दुकान हटाई गई, तो उनकी रोजी-रोटी के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों की पूर्ण जांच और विधिक प्रक्रिया के बाद ही आगे का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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