पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रभारी प्राचार्य विवाद, हाईकोर्ट ने दिए कॉमन काउंसलिंग कराने के निर्देश
मध्य प्रदेश के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रभारी प्राचार्यों की नियुक्ति पर जबलपुर हाईकोर्ट ने संशोधित आदेश जारी कर राज्य सरकार को ओपन काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में संचालित 'प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' (PM College of Excellence) में प्रभारी प्राचार्यों की पदस्थापना के संबंध में जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने संशोधित आदेश जारी किए हैं।
माननीय न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता प्रोफेसरों और पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रभारी प्राचार्य बनने के इच्छुक सभी पात्र प्राध्यापकों के लिए राज्य सरकार द्वारा कॉमन और ओपन काउंसलिंग (Common & Open Counseling) का आयोजन किया जाए। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पदस्थापना प्रक्रिया में पारदर्शिता, विकल्प और निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना है।
📜 जूनियर प्रोफेसरों को प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने पर भड़का था विवाद
उल्लेखनीय है कि पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में सीनियर प्रोफेसरों को नजरअंदाज कर जूनियर प्रोफेसरों को प्रभारी प्राचार्य का प्रभार दिए जाने को असंवैधानिक करार देते हुए कार्यरत वरिष्ठ प्राध्यापकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
-
पूर्व आदेश व सरकारी अपील: पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा वरिष्ठ प्रोफेसरों को ही प्राचार्य पद का दायित्व सौंपने के आदेश जारी किए गए थे, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दायर की थी। इसके साथ ही कॉलेज में वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति देने संबंधी आदेश को भी सरकार ने चुनौती दी थी।
-
सरकार का तर्क: राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में पदस्थापना विशुद्ध रूप से मेरिट के आधार पर की जाती है और प्रभारी प्राचार्य का प्रभार देना कोई नियमित पदोन्नति (Regular Promotion) नहीं है।
⚖️ सभी 10 अपीलों पर एक साथ सुनवाई: प्राचार्यों को मिलेंगे अन्य 2 सरकारी कॉलेजों के विकल्प
हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने दायर सभी 10 अपीलों पर विस्तृत सुनवाई करते हुए पूर्व में फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब सभी अपीलों का अंतिम निराकरण करते हुए अदालत ने संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, "यदि याचिकाकर्ता प्रोफेसरों को उनकी पसंद का पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त नहीं होता है या वे उक्त कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य का पद स्वीकार करने से इनकार करते हैं, तो उन्हें कम से कम 2 अन्य शासकीय महाविद्यालयों का विकल्प प्रदान किया जाए। उनके द्वारा चुने गए विकल्प के आधार पर संबंधित कॉलेज में उन्हें पदस्थ किया जा सकता है।"
🏫 वर्तमान कॉलेज में बने रहने का भी मिलेगा अवसर, वरिष्ठता पर विचार के निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु जोड़े हैं:
-
आपत्ति का अधिकार नहीं: यदि संबंधित प्रोफेसर अपनी इच्छा से वर्तमान कॉलेज में ही बने रहने का विकल्प चुनते हैं, तो ऐसी स्थिति में वे भविष्य में इस आधार पर कोई कानूनी आपत्ति दर्ज नहीं करा सकेंगे कि पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में उनसे जूनियर प्रोफेसर को प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है।
-
सामान्य कॉलेजों में वरिष्ठता: युगलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस से स्थानांतरित होकर नियमित शासकीय कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में पदस्थ होने वाले शिक्षकों को उस कॉलेज में वरिष्ठता (Seniority) के आधार पर प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने पर भी प्राथमिकता से विचार किया जाए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)