इंदौर में मेट्रो स्टेशन के लिए कटे 200 पेड़, बेघर हुए 5 हजार तोते, हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुआ काम
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर के आदेश के बाद रीगल चौराहे व रानी सराय में मेट्रो स्टेशन के लिए 200 पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है, जिससे 5 हजार पक्षी बेघर हो गए।
इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के आदेश के बाद इंदौर में प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के लिए चिह्नांकित रानी सराय और रीगल चौराहा क्षेत्र में जमीन पर काम शुरू कर दिया गया है।
प्रोजेक्ट के मार्ग में आ रहे करीब 200 पुराने पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि इन घने पेड़ों पर पिछले कई सालों से लगभग 5 हजार तोतों और अन्य पक्षियों का स्थायी आशियाना था। कटाई के बाद जब शाम को पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटे, तो वहां का नजारा बदला हुआ था और मैदान पूरी तरह साफ हो चुका था।
🏛️ इंदौर हाईकोर्ट में लगाई गई थी जनहित याचिका, कोर्ट ने शर्तों के साथ दी कटाई की अनुमति
इंदौर हाईकोर्ट में रीगल चौराहे पर स्थित 200 से अधिक घने पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने के लिए याचिका दायर की गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने मेट्रो कंपनी को मेट्रो स्टेशन विस्तार के व्यापक जनहित को देखते हुए पेड़ों की कटाई करने की अनुमति दे दी।
याचिकाकर्ता पद्मश्री भालू मोढ़े के वकील अभिनव पी. धनोतकर ने बर्ड एक्सपर्ट अजय गाड़ीकर के आंकड़ों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया, "इन विशाल पेड़ों पर रोजाना करीब 5000 पक्षी विश्राम और आश्रय लेते हैं। सुबह भोजन की तलाश में निकलने वाले ये पक्षी हर शाम यहीं लौटते हैं।" हालांकि, पक्षियों की इस सटीक संख्या की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
🌿 'पेड़ों के ट्रांसप्लांट की सफलता दर कम', पक्षी विशेषज्ञों की निगरानी में होगी कटाई
याचिका में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया था कि पेड़ों की कटाई से पक्षियों के प्राकृतिक आवास तंत्र (Ecosystem) पर बहुत गहरा और प्रतिकूल असर पड़ेगा। साथ ही कटाई की प्रक्रिया शुरू करने से पहले किसी बर्ड एक्सपर्ट की सलाह न लिए जाने पर भी सवाल खड़े किए गए थे।
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हाईकोर्ट के निर्देश: हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पेड़ों की कटाई को चरणबद्ध तरीके से बर्ड एक्सपर्ट्स की सीधी निगरानी में करने के सख्त आदेश दिए हैं।
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ट्रांसप्लांट पर सवाल: एडवोकेट अभिनव धनोतकर ने पेड़ों को री-ट्रांसप्लांट करने की सफलता दर पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों में इसकी सफलता काफी कम दर्ज की गई है।
🕊️ शाम को लौटे पक्षियों को नहीं मिला आशियाना, आकाश में मंडराते दिखे बेघर तोते
सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि नए पौधे लगाने के बाद उन्हें बड़ा होकर पर्यावरण को पर्याप्त लाभ पहुंचाने में कई वर्ष लग जाएंगे, और इन पुराने वृक्षों की पारिस्थितिक भूमिका की तत्काल भरपाई संभव नहीं है।
पेड़ों की कटाई शुरू होने वाले दिन रीगल और रानी सराय क्षेत्र में रहने वाले पक्षी हमेशा की तरह सुबह पेड़ों से उड़े थे, लेकिन जब वे शाम को वापस लौटे, तो वे पेड़ काटे जा चुके थे। अपने उजड़े हुए आशियाने की तलाश में सैकड़ों पक्षी देर शाम तक आसमान में ही बेबस होकर मंडराते देखे गए।
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