घरेलू हिंसा मामले में इंदौर सत्र न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला, अलग रहने वाली ननद-जेठानी को नहीं बनाया जा सकेगा आरोपी
घरेलू हिंसा मामलों में इंदौर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला दिया है। अलग रहने वाली या साझी गृहस्थी का हिस्सा न होने वाली ननद और जेठानी को आरोपी नहीं बनाया जा सकेगा।
इंदौर । पति-पत्नी के बीच होने वाले घरेलू विवाद और हिंसा के बाद पत्नी द्वारा पति के पूरे परिवार (ससुराल पक्ष) को आरोपी बनाने की प्रवृत्ति पर अब अंकुश लगेगा। इंदौर सत्र न्यायालय ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत के इस निर्णय से उन परिवारों और रिश्तेदारों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें किसी विवाद के दौरान अकारण ही केस में घसीट लिया जाता था।
📜 अदालत का स्पष्ट रुख: साझी गृहस्थी का हिस्सा न होने वालों पर नहीं चलेगा केस
इंदौर सत्र न्यायालय ने घरेलू हिंसा मामले में फैसला देते हुए स्पष्ट रूप से कहा:
"घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पीड़ित पक्ष या पत्नी अपनी उन ननद या जेठानी को आरोपी नहीं बना सकेगी जो अपने अलग ससुराल में रहती हैं अथवा पीड़िता के साथ साझी गृहस्थी (Shared Household) का हिस्सा नहीं हैं। पीड़िता द्वारा बदले की भावना से दर्ज कराए जाने वाले ऐसे प्रकरणों से जेठानी या ननद के अलावा पति पक्ष के उन अन्य रिश्तेदारों को भी पूर्ण राहत मिल सकेगी जो घटना के समय साझी गृहस्थी में साथ नहीं रह रहे थे।"
⚖️ अकारण हवालात और केस के लंबे खिंचने से मिलेगी मुक्ति: एडवोकेट प्रीति मेहना
पारिवारिक मामलों की वरिष्ठ अधिवक्ता (Family Court Senior Advocate) प्रीति मेहना ने इस फैसले के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा:
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निर्दोष परिवारों को राहत: इंदौर सत्र न्यायालय का यह निर्णय उन निर्दोष परिवारों के लिए एक बड़ी संजीवनी है, जिन्हें पारिवारिक विवादों के बाद बहू द्वारा केवल पति का सगा-संबंधी होने के कारण अकारण आरोपी बना दिया जाता था।
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सहानुभूति की आड़ में अन्याय पर रोक: कई मामलों में शादीशुदा ननद या अलग रहने वाली जेठानी को भी ज़मानत न मिल पाने के कारण हवालात की हवा खानी पड़ती थी, जिससे उनका खुद का वैवाहिक जीवन और गृहस्थी तबाह हो जाती थी।
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समय और धन की बचत: केस सालों-साल चलने के कारण इन दूर के रिश्तेदारों को भी अप्रत्यक्ष रूप से कानूनी प्रक्रिया की सजा भुगतनी पड़ती थी। कोर्ट ने फिलहाल घरेलू हिंसा से जुड़े प्रकरणों में यह बेहद महत्वपूर्ण कानूनी राहत प्रदान की है।
📊 मध्य प्रदेश में 28 फीसदी विवाहित महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार: NFHS रिपोर्ट
अदालती राहत के बीच मध्य प्रदेश में घरेलू हिंसा की ज़मीनी सच्चाई भी चिंताजनक बनी हुई है:
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सर्वेक्षण के आंकड़े: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey) 2026 के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की घटनाएं लगातार दर्ज की जा रही हैं।
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राष्ट्रीय औसत से अधिक: जहां देश भर में राष्ट्रीय औसत के लिहाज से महिलाएं 21.4% की दर से घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश में 28% महिलाएं अपने जीवन में इस स्थिति का सामना कर चुकी हैं।
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प्रभावित आयु वर्ग: हिंसा का शिकार होने वाली महिलाओं में मुख्य रूप से 18 वर्ष से 49 वर्ष तक की आयु वर्ग की विवाहित महिलाएं शामिल हैं।
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