दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सनी देओल की फिल्म 'सूर्या' के खिलाफ PIL खारिज, जानिए क्या है वजह

दिल्ली हाई कोर्ट ने सनी देओल की फिल्म 'सूर्या' के खिलाफ आपत्तिजनक दृश्यों को लेकर दायर PIL खारिज की। कोर्ट ने कहा एक ही मुद्दे पर समानांतर कार्यवाही का औचित्य नहीं।

Nov 04, 2026 - 15:38
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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सनी देओल की फिल्म 'सूर्या' के खिलाफ PIL खारिज, जानिए क्या है वजह

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म 'सूर्या: अंत से आरंभ तक' से कथित तौर पर आपत्तिजनक दृश्यों और संवादों (डायलॉग्स) को हटाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से साफ इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने इसकी वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि मेडिकल समुदाय की ओर से इस विषय पर पहले ही एक अन्य याचिका दायर की जा चुकी है, जिस पर एक एकल न्यायाधीश (Single-Judge) की पीठ पहले से ही विचार कर रही है। ऐसे में कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज कर दी कि एक ही कानूनी मुद्दे पर समानांतर कार्यवाहियां (Parallel Proceedings) चलाना उचित नहीं है।

🎬 टीजर में दिखाए गए थे स्वास्थ्य संस्थानों में भ्रष्टाचार और डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के दृश्य

याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियां:

  • टीजर पर आपत्ति: इस जनहित याचिका में याचिकाकर्ताओं द्वारा फिल्म के आधिकारिक टीजर में दिखाए गए कुछ विशिष्ट दृश्यों पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी।

  • भ्रष्टाचार और हिंसा का चित्रण: इन दृश्यों में स्वास्थ्य संस्थानों के भीतर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनैतिक प्रथाओं को दिखाया गया था। साथ ही, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ शारीरिक हिंसा को सही या एक वीरतापूर्ण कार्य के रूप में प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाया गया था।

🚫 'सुनवाई जारी रखने का कोई कारण नजर नहीं आता'; कोर्ट ने दोहराया पुराना रुख

अचूक टिप्पणियां और सरकारी पक्ष:

  • अदालत का आदेश: कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि, "हमें इस जनहित याचिका पर विचार करने का कोई औचित्य नहीं दिखता, क्योंकि डॉक्टरों के समुदाय की ओर से इस मुद्दे को पहले ही उठाया जा चुका है। जब किसी अन्य अदालत में इस पर विचार चल रहा है, तो कई कार्यवाहियां चलाने का कोई कारण नहीं है।"

  • सरकार की दलील: सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील निशांत गौतम ने कोर्ट को पहले से लंबित याचिका के बारे में जानकारी दी और बताया कि फिल्म को सेंसर बोर्ड (सर्टिफिकेशन) देने की प्रक्रिया अभी चल रही है। यह याचिका ऑल इंडिया डॉक्टर्स संस्था की लीगल सेल के उपाध्यक्ष नचिकेता भाटिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के राष्ट्रीय प्रवक्ता व मेडिकल प्रोफेशनल ध्रुव चौहान द्वारा दायर की गई थी।

💊 फिल्म के सीन्स को बताया गया भ्रामक; कहा- पूरी चिकित्सा व्यवस्था को भ्रष्ट दिखाया गया

याचिकाकर्ताओं के तर्क:

  • आर्थिक शोषण का आरोप: याचिका में तर्क दिया गया कि फिल्म के टीजर में ऐसे संवाद हैं, जिनमें मरीजों के आर्थिक शोषण का आरोप लगाया गया है—जैसे मरीजों से भारी-भरकम बिल वसूलना, अनावश्यक डायग्नोस्टिक टेस्ट करवाना और कमीशन के लालच में दवाइयां लिखना।

  • व्यवस्था पर असर: याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इन दृश्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि चिकित्सा पेशे में पूरी व्यवस्था ही भ्रष्ट है, जिससे जनता का स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा उठ सकता है और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

📅 चार डॉक्टरों द्वारा दायर एक अन्य याचिका पर पहले ही जारी हो चुका है नोटिस

अतिरिक्त कानूनी अपडेट:

  • अन्य मामला: इससे पहले सोमवार को जस्टिस अमित महाजन ने चार डॉक्टरों द्वारा इसी मुद्दे को लेकर दायर एक अन्य याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें फिल्म के टीजर को तुरंत हटाने की मांग की गई है।

  • अगली तारीख: अदालत ने उस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है।

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