मध्य प्रदेश कानूनी न्यूज़: 15 दिन और 15 कार्य दिवस के पेंच पर अड़े अधिवक्ता, दीपावली छुट्टियों का दिया हवाला
जबलपुर में अदालत के आदेश पर टली कुर्की की कार्रवाई। 15 दिन में भुगतान के लिखित आश्वासन पर अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच बनी सहमति।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में अदालत के आदेश पर एक दिलचस्प प्रशासनिक और कानूनी घटनाक्रम देखने को मिला। कोर्ट के नाजिर के साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ता सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए, जहाँ भुगतान की समयसीमा को लेकर अधिकारियों और वकीलों के बीच लंबी बातचीत हुई। प्रशासन द्वारा भुगतान के मामले में दी जाने वाली समयसीमा को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई, जिसके बाद अंततः प्रशासन ने 15 दिन के भीतर भुगतान करने का लिखित भरोसा दिया। इस समझौते के बाद ही कुर्की की आगामी कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया।
⏱️ "15 दिन और 15 कार्य दिवस अलग-अलग हैं"; वकीलों की आपत्ति के बाद बदला गया लिखित आश्वासन
समयसीमा को लेकर विवाद और तर्क:
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प्रशासन का शुरुआती रुख: प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले लिखित आश्वासन में भुगतान के लिए '15 कार्य दिवस' (Working Days) दर्ज करने की कोशिश की थी।
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वकीलों की कड़ी आपत्ति: इस बात पर अधिवक्ताओं ने तत्काल आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि '15 दिन' और '15 कार्य दिवस' दोनों बिल्कुल अलग चीजें होती हैं, इसलिए समयसीमा स्पष्ट होनी चाहिए।
🪔 दीपावली की छुट्टियों का हवाला देकर अधिकारियों को घेरा; अपर कलेक्टर और एसडीएम रहे मौजूद
प्रशासनिक स्तर पर मान-मनौव्वल और बैठक:
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अधिकारियों की उपस्थिति: कलेक्ट्रेट परिसर में स्थिति को संभालने के लिए अपर कलेक्टर शैलेंद्र सिंह, एसडीएम पंकज मिश्रा और आर.एस. मरावी ने मोर्चा संभाला और अधिवक्ताओं को समझाने का प्रयास किया।
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छुट्टियों का तर्क: अधिवक्ताओं ने आगामी दीपावली के त्योहार और छुट्टियों का हवाला देते हुए सवाल उठाए कि यदि कार्य दिवस जोड़े गए, तो भुगतान में लंबा विलंब हो जाएगा। वकीलों के कड़े रुख को देखते हुए अंततः प्रशासन को झुकना पड़ा और 15 सीधे दिनों के भीतर भुगतान का लिखित आश्वासन देना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
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