सेना प्रमुख इयाल जमीर और नेतन्याहू के बीच हुआ था विवाद, सुरक्षा अधिकारियों को थी बड़े युद्ध की आशंका
इजराइल के पीएम नेतन्याहू की चुनाव से पहले ईरान पर हमले की योजना। अमेरिकी दखल के बाद ऑपरेशन रुका। मीडिया रिपोर्ट में बड़ा दावा। पूरी खबर पढ़ें।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख रोमन गोफमैन ने 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से ठीक पहले ईरान पर एक बड़ा हमला करने की गुप्त योजना तैयार की थी। हालांकि, इस संवेदनशील ऑपरेशन की भनक अमेरिकी प्रशासन को लग गई, जिसके बाद अमेरिका ने तुरंत दखल दिया और इस पूरी योजना को रुकवा दिया। इजराइल के प्रमुख टीवी चैनल 12 ने अपनी एक रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे की किसी स्वतंत्र एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।
📉 सुरक्षा अधिकारियों को था बड़े युद्ध और चुनाव टलने का डर; एक गलती से लीक हुई प्लान की जानकारी
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु और आशंकाएं:
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अधिकारियों का विरोध: मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल की सुरक्षा एजेंसियों के कई शीर्ष अधिकारी इस सैन्य योजना के पूरी तरह खिलाफ थे। उन्हें इस बात का गहरा डर था कि ईरान पर हमला करने से दोनों देशों के बीच एक विकराल युद्ध छिड़ सकता है, जिसके कारण 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव भी अनिश्चितकाल के लिए टल सकते थे।
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लीक कैसे हुई जानकारी: तमाम विरोध के बावजूद हमले की तैयारियां अंदरखाने जारी थीं। बताया गया कि इजराइल के ही एक सुरक्षा अधिकारी से अनजाने में बड़ी गलती हो गई, जिससे अमेरिका को इस गुप्त ऑपरेशन की पुख्ता जानकारी मिल गई। इसके बाद वॉशिंगटन ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए योजना को रोक दिया। चैनल 12 ने स्पष्ट किया कि उसने यह खबर इजराइल के कड़े सैन्य सेंसरशिप नियमों के दायरे में रहकर दिखाई है।
🏛️ सेना प्रमुख इयाल जमीर और नेतन्याहू के बीच हुआ था तीखा विवाद; लिखित मंजूरी की मांग
नेतन्याहू और सैन्य नेतृत्व में खींचतान:
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तनाव की खबरें: इस रिपोर्ट से पहले भी 25 अक्टूबर को चैनल 12 ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू और इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर के बीच चल रहे गंभीर तनाव का खुलासा किया था। रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने एक सैन्य कार्रवाई का कड़ा आदेश दिया था, लेकिन सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को अंदेशा था कि इससे ईरान के साथ क्षेत्रीय तनाव खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।
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जमीर का विरोध: सेना प्रमुख जमीर ने इस कार्रवाई का खुलकर विरोध किया था। उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे चर्चा करने और नेतन्याहू से लिखित कानूनी मंजूरी की मांग की थी। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन सभी मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें 'बकवास' बताया और कहा कि नेतन्याहू पहले ही साफ कर चुके हैं कि चुनाव से पहले ईरान पर हमले की कोई योजना नहीं थी।
🤝 ट्रंप से दोबारा युद्ध शुरू करने की अपील; अमेरिकी राष्ट्रपति रखना चाहते हैं बातचीत का रुख
अमेरिका और इजराइल के कूटनीतिक संबंध:
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नेतन्याहू की अपील: यह गरमागरम खबर ऐसे वक्त में सामने आई है जब कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को पूरी तरह खत्म करने के लिए कूटनीतिक बातचीत चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर से हमले शुरू करने की अपील की थी।
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ट्रंप का रुख: हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में बातचीत को और अधिक समय देना चाहते हैं। हाल ही में ट्रंप ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ईरान से लगातार बातचीत कर रहा है और पिछले छह-सात महीनों में उनका एक भी सैनिक नहीं मारा गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर उन्होंने अतीत में ईरान को परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका होता, तो आज इजराइल और पूरा मध्य पूर्व (Middle East) अस्तित्व में ही नहीं होता।
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