पुजारियों पर लग रहे आरोपों के बीच अखाड़ा परिषद का सख्त रुख; कहा- ड्रेस कोड से रुकेगी दान की धांधली

मंदिरों में दान चोरी और अनियमितताओं पर अखाड़ा परिषद का बड़ा सुझाव। पुजारियों के लिए 'बिना जेब' वाली यूनिफॉर्म लागू करने की मांग। जानें क्या है पूरा मामला।

Jul 10, 2026 - 16:17
0
पुजारियों पर लग रहे आरोपों के बीच अखाड़ा परिषद का सख्त रुख; कहा- ड्रेस कोड से रुकेगी दान की धांधली

उज्जैन। देशभर के बड़े मंदिरों में दान-चढ़ावे में हो रही गड़बड़ियों और पुजारियों पर उठ रहे सवालों के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने एक क्रांतिकारी समाधान सुझाया है। परिषद का मानना है कि यदि मंदिरों में पुजारियों के लिए 'बिना जेब वाली यूनिफॉर्म' (ड्रेस कोड) लागू कर दी जाए, तो दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता आएगी और चोरी जैसी घटनाओं पर विराम लग सकेगा। हाल ही में अयोध्या, बगलामुखी और खजराना जैसे मंदिरों में सामने आए विवादों के बाद संत समाज ने यह कड़ा रुख अपनाया है।

🛡️ 'बिना जेब' का तर्क: विवादों से मिलेगी मुक्ति

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने उज्जैन में कहा कि मंदिरों की गरिमा बनाए रखने के लिए पुजारियों की वेशभूषा में बदलाव जरूरी है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में यह व्यवस्था पहले से प्रभावी है, जहाँ पुजारियों के कुर्ते में जेब नहीं होती। इससे श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से दानपेटी में ही राशि डालते हैं, जिससे पुजारियों पर लगने वाले 'दान चोरी' के आरोपों की गुंजाइश खत्म हो जाती है। उनका सुझाव है कि पुजारियों का वेतन और दैनिक खर्च ट्रस्ट द्वारा वहन किया जाना चाहिए।

🚫 पुजारियों को बदनाम करने का खेल रोकने की कोशिश

रविंद्र पुरी महाराज ने बगलामुखी मंदिर प्रकरण पर चर्चा करते हुए कहा कि बिना ठोस सबूतों के पुजारियों को बदनाम करना उचित नहीं है। कई बार श्रद्धालु स्वेच्छा से दक्षिणा देते हैं, जिसे गलत तरीके से पेश किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना जेब वाली यूनिफॉर्म होने से किसी भी गलतफहमी की संभावना नहीं रहेगी और मंदिर की पवित्रता बनी रहेगी।

🔒 सुरक्षा और मर्यादा का रखा जाए ध्यान

महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद जी महाराज ने इस दिशा में और सुधारों की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े मंदिरों में ड्रेस कोड के साथ-साथ प्रवेश और निकास द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होनी चाहिए। उन्होंने मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी निगरानी पर जोर देते हुए कहा कि मंदिरों में हो रही अनियमितताएं सीधे तौर पर सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, जिसे सुधारना संतों और ट्रस्ट की जिम्मेदारी है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User