दुबई से सट्टेबाजी रैकेट चलाने के आरोपी सतीश सनपाल को बड़ा झटका, FIR रद्द करने से HC का इनकार
जबलपुर हाईकोर्ट ने दुबई से अवैध गतिविधियां संचालित करने के आरोपी सतीश सनपाल की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में सबूतों के आधार पर जांच होगी।
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से जुड़े एक बड़े और चर्चित मामले में जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने आरोपी सतीश सनपाल को करारा झटका दिया है। अदालत ने जबलपुर के 4 विभिन्न थानों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली सतीश सनपाल और अन्य सह-आरोपियों की सभी याचिकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि डिजिटल युग के इस दौर में किसी भी साइबर या आर्थिक अपराध को अंजाम देने के लिए आरोपी का घटनास्थल पर शारीरिक रूप से मौजूद होना अनिवार्य शर्त नहीं है। इस मामले की अब ट्रायल कोर्ट में सबूतों के आधार पर विधिवत जांच की जाएगी।
🌐 दुबई से संचालित हो रहा था सट्टेबाजी का रैकेट, याचिका में दिए गए थे ये तर्क
दुबई में रहकर अवैध गतिविधियां संचालित करने के मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में आरोपित सतीश सनपाल की ओर से जबलपुर के 4 थानों में दर्ज मामलों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया था कि सतीश साल 2020 से लगातार दुबई में रह रहा है और मार्च 2020 के बाद से भारत नहीं आया है। छापेमारी के दौरान गिरफ्तार अन्य आरोपियों के बयानों और फर्जी शेल कंपनियों के जरिए धोखाधड़ी के जो आरोप लगाए गए हैं, उनके समर्थन में कोई ठोस मनी ट्रेल, फोरेंसिक सबूत या चैट रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। साथ ही बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि जब्त दस्तावेजों और बैंक खातों से याचिकाकर्ता की कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित नहीं होती है।
🔨 'डिजिटल युग के अपराधों में शारीरिक मौजूदगी जरूरी नहीं', हाईकोर्ट की दो टूक
राज्य सरकार और शासकीय अधिवक्ता की ओर से इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा गया कि पुलिस ने गहन जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए हैं और अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, जिससे प्रथम दृष्टया अपराध पूरी तरह बनता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि मामले में पर्याप्त सामग्री और साक्ष्य जांच के दौरान सामने आए हैं, इसलिए इसे केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि आरोपी विदेश में बैठा था। अदालत ने साफ किया कि इस तरह के मामलों की सत्यता की जांच अब ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और सबूतों की बिना पर ही की जाएगी।
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