नीमच में जंगली सुअरों और नीलगायों का आतंक, मक्का और पपीते की फसल चौपट, किसान परेशान

नीमच जिले की जीरन तहसील के किसानों को 2024-25 की खरीफ फसल बीमा राशि नहीं मिलने पर रोष है। साथ ही खेतों में जंगली सुअरों के आतंक से फसलें तबाह हो रही हैं।

Aug 05, 2026 - 16:57
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नीमच में जंगली सुअरों और नीलगायों का आतंक, मक्का और पपीते की फसल चौपट, किसान परेशान

नीमच : जीरन तहसील के अधिकांश गांवों के किसानों में वर्ष 2024-25 की खरीफ फसल बीमा राशि अब तक नहीं मिलने के कारण भारी रोष व्याप्त है। अपनी इसी मांग को लेकर किसानों ने जिला जनसुनवाई में पहुँचकर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है और जल्द से जल्द बीमा राशि उनके खातों में ट्रांसफर करने की मांग की है।

जीरन तहसील के अंतर्गत आने वाले प्रमुख गांवों जैसे घोकलखेड़ा, चल्दू, अर्निंयाबोराना, माताखेड़ी, बरखेड़ा सौंधिया, भंवरासा, कचोली और अन्य आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि, "उन्होंने हर वर्ष की तरह इस बार भी अपनी फसल बीमा प्रीमियम की राशि समय पर बैंक में जमा कराई थी, इसके बावजूद वर्ष 2024-25 की खरीफ फसल का बीमा क्लेम अब तक उनके खातों में प्राप्त नहीं हुआ है।"

⚠️ बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर किसान, आंदोलन की दी चेतावनी

बीमा राशि को लेकर जब किसानों ने संबंधित बैंक प्रबंधकों से संपर्क किया, तो उनका कहना है कि अभी तक ऊपर से कोई बीमा राशि नहीं आई है, और जैसे ही आएगी, वह सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

इसके बाद जब किसान बैंक और कृषि विभागों के पास जाते हैं, तो उन्हें एक-दूसरे विभाग के पास टरकाया जाता है, जिससे उन्हें लगातार मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की तत्काल जांच कर पात्र किसानों को बीमा राशि नहीं दी गई, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। चल्दू के सरपंच महेंद्र सिंह ने इस संबंध में बताया कि, "समय पर प्रीमियम की पूरी राशि भरने के बाद भी आज अन्नदाता को उनके हक का बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है।"

🐗 खेतों में जंगली सुअरों और नीलगायों का भारी आतंक, फसलें चौपट

बीमा राशि की समस्या के अलावा जीरन तहसील के ही ग्राम कराड़िया महाराज में इन दिनों जंगली सुअरों और नीलगायों के झुंडों ने भयंकर आतंक मचा रखा है।

ग्रामीण किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों के झुंड के झुंड रात के समय खेतों में घुसकर मक्का, पपीता और अन्य खरीफ सीजन की तैयार खड़ी फसलों को बुरी तरह रौंदकर नष्ट कर रहे हैं। इस भारी नुकसान के कारण किसान आर्थिक और मानसिक रूप से गहरे संकट में आ गए हैं।

कराड़िया महाराज के पीड़ित किसान अम्बालाल पाटीदार ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि, "उन्होंने अपने 3 बीघा खेत में करीब 20 हजार रुपये की लागत से 8 किलो अमेरिकन मक्का का बीज बोया था। इसके बाद डीएपी, यूरिया, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों पर कुल मिलाकर लगभग 50 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन जब फसल पूरी तरह पककर तैयार होने वाली थी, तब मात्र दो दिनों के भीतर जंगली सुअरों ने पूरी मेहनत पर पानी फेरते हुए फसल चौपट कर दी।"

🌙 जान जोखिम में डालकर रातभर खेतों की रखवाली करने को विवश किसान

एक अन्य किसान देवकन्या बाई पाटीदार ने अपनी समस्या साझा करते हुए बताया कि, "उनके 2 बीघा खेत में हाईब्रिड पपीते की शानदार फसल लहलहा रही है। खेत की सुरक्षा के लिए मजबूत लोहे की जाली और तार फेंसिंग करने के बावजूद जंगली सुअरों के झुंड जबरन घुसकर लगातार फसल को नुकसान पहुँचा रहे हैं।"

वर्तमान हालात यह हैं कि खेतों की रखवाली करना भी बेहद जोखिम भरा हो चुका है, और जंगली जानवरों के हमले के डर के बावजूद किसानों को अपनी पूंजी बचाने के लिए रातभर खेतों पर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। क्षेत्र के अधिकांश गांवों में किसानों के लिए अब खेती करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।

चीताखेड़ा के एक अन्य किसान गोपाल जावरिया ने बताया कि उनकी ढाई बीघा मक्का की फसल भी पकने की स्थिति में आ चुकी है, लेकिन जंगली सुअरों के झुंड लगातार खेतों में घुसकर खाने और रौंदने के नाम पर पूरी फसल बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस दोहरी मार से बचाने के लिए जल्द से जल्द उचित मुआवजा और ठोस कदम उठाए जाएं।

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