रामघाट पर शिप्रा आरती को लेकर प्रशासन और तीर्थ पुरोहित आमने-सामने, महाकाल बटुकों ने की आरती

उज्जैन के रामघाट पर महाकाल मंदिर समिति द्वारा शुरू की गई शिप्रा आरती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पंडा समिति के विरोध के बावजूद बटुकों ने आरती की।

Aug 08, 2026 - 11:27
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रामघाट पर शिप्रा आरती को लेकर प्रशासन और तीर्थ पुरोहित आमने-सामने, महाकाल बटुकों ने की आरती

उज्जैन। यहाँ के पवित्र रामघाट पर रोज होने वाली शिप्रा आरती को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। शिप्रा आरती के संचालन को लेकर शुक्रवार शाम जिला प्रशासन और स्थानीय तीर्थ पुरोहित आमने-सामने आ गए। पिछले लगभग 11 साल से शिप्रा किनारे लगातार पूजन-पाठ कराने वाले तीर्थ पुरोहित ही यहाँ आरती कराते आ रहे थे, लेकिन अब महाकाल मंदिर समिति ने महाकाल मंदिर के वैदिक बटुकों को इस आरती की आधिकारिक जिम्मेदारी सौंप दी है, जिसका तीर्थ पुरोहित कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस बदलाव के चलते घाट पर तनाव और विवाद की स्थिति बन गई।

शुक्रवार शाम जब महाकाल मंदिर समिति के बटुक रामघाट पर आरती करने पहुँचे, तो पंडा समिति के पुरोहितों ने उन्हें रोक दिया। इस बढ़ते विवाद को देखते हुए एसडीएम एलएन गर्ग, पवन बारिया और भारी संख्या में महाकाल थाना पुलिस का बल पहले से ही घाट पर मौजूद था। एसडीएम ने पुरोहितों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे बटुकों को आरती नहीं करने देने की जिद पर अड़े रहे। लगभग आधे घंटे तक दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर पुरोहितों को घाट से हटाया और महाकाल मंदिर समिति के बटुकों से विधिवत आरती संपन्न कराई।

📜 21 विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू की भव्य आरती

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने गुरुवार शाम से रामघाट के समीप एक नई शिप्रा आरती की शुरुआत कर दी है। मंदिर समिति द्वारा संचालित 'श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान' के 21 कुशाग्र विद्यार्थियों ने पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह आरती की। प्रशासन के इस अहम निर्णय को धार्मिक और तीर्थ परंपरा के परिष्कार तथा वैदिक शिक्षा को उचित सम्मान दिलाने का एक बड़ा माध्यम माना जा रहा है।

इस नवाचार से देश की गुरुकुल पाठशालाओं में वेदाध्ययन करने वाले वेदपाठी बटुकों के लिए स्वर्णिम भविष्य के नए द्वार खुल गए हैं। गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीक भगवान श्रीकृष्ण की यह शिक्षा स्थली पिछले साढ़े पाँच हजार सालों से वेद, व्याकरण और संस्कृति-साहित्य के अध्ययन-अध्यापन का प्रमुख केंद्र रही है। वर्तमान में भी उज्जैन की इस धर्मधरा पर महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान तथा महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के माध्यम से देश भर के छात्र वेदाध्ययन कर रहे हैं।

🎓 बटुकों के भविष्य के लिए नए अवसर और रोल मॉडल बनेगी व्यवस्था

वेद, ज्योतिष, कर्मकांड और मंदिर प्रबंधन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा की डिग्री हासिल करने के बाद इन विद्यार्थियों के भविष्य की राह आमतौर पर तीर्थों और मंदिरों तक ही सीमित रहती है, जहाँ उन्हें पहले से चली आ रही वंश परंपरा के अनुसार केवल सहायक के तौर पर काम करना पड़ता था। लेकिन मंदिर समिति द्वारा शिप्रा तट पर शुरू की गई इस नई आरती से परंपरा में परिष्कार और बटुकों के भविष्य की संभावनाओं को नए पंख लगे हैं।

इन संस्थानों से डिग्री प्राप्त कर चुके ये युवा बटुक देश के विभिन्न तीर्थों और मंदिरों की धार्मिक व्यवस्था को और अधिक शास्त्रसम्मत और सशक्त बना सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों के लिए एक 'रोल मॉडल' बनेगी। मंदिर समिति ने पुरानी और पारंपरिक व्यवस्था में कहीं भी कोई हस्तक्षेप नहीं किया है; शिप्रा के अन्य सभी घाटों पर पुरानी आरती पहले की तरह यथावत चल रही है। केवल एक घाट पर यह नई आरती शुरू की गई है, जिससे शिप्रा का वैभव और अधिक बढ़ेगा।

⚠️ पंडा समिति का तीखा विरोध: प्राचीन परंपरा में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

दूसरी ओर, श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष एवं तीर्थ पुरोहित पं. राजेश त्रिवेदी आमवाला पंडा ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि महाकाल मंदिर समिति ने शिप्रा घाट पर नई आरती शुरू करके सनातन हिंदू धर्म की प्राचीन परंपरा को तोड़ने का दुस्साहस किया है।

उन्होंने कहा कि अनादिकाल से तीर्थों और मंदिरों की अपनी विशिष्ट परंपरा और मर्यादा रही है, जहाँ पूजा-अर्चना का अधिकार केवल वंश परंपरा के आधार पर तीर्थ पुरोहितों और पुजारियों का होता है। इस तरह के हस्तक्षेप से पुरातन व्यवस्था पूरी तरह भंग हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मंदिर समिति इस तरह से अपनी परंपरा को खंडित करेगी, तो पुरोहितों को भी महाकाल मंदिर के गर्भगृह में स्वतंत्र रूप से पूजन करने का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए।

🤝 प्रशासन का पक्ष: आरती के स्वरूप में किया जा रहा है नवाचार

इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए एसडीएम पवन बारिया ने स्पष्ट किया कि महाकाल प्रबंध समिति की ओर से केवल एक नई शुरुआत की जा रही है। जिस प्रकार हरिद्वार में गंगा नदी की तर्ज पर भव्य आरती होती है, उसी प्रकार उज्जैन में भी शिप्रा नदी के तट पर भव्य और सुव्यवस्थित आरती शुरू करने का यह निर्णय है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसी को हटाना या रोकना नहीं है, बल्कि मंदिर समिति आरती के स्वरूप में एक सकारात्मक नवाचार ला रही है।

एसडीएम एलएन गर्ग ने यह भी बताया कि प्रशासन ने विवाद को सुलझाने के लिए पंडा समिति के पुरोहितों को महाकाल मंदिर समिति के बटुकों के साथ संयुक्त रूप से आरती में शामिल होने का खुला प्रस्ताव दिया था, ताकि दोनों पक्ष मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से आरती कर सकें। हालाँकि, पुरोहित इस प्रस्ताव के लिए तैयार नहीं हुए। प्रशासन के अनुसार, अब आगे से रोजाना यह शिप्रा आरती महाकाल मंदिर समिति की देखरेख में ही नियमित रूप से संपन्न कराई जाएगी।

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