डेंगू के लार्वा पर 'गंबूशिया' मछली का जैविक वार, भोपाल में मरीजों की संख्या में भारी गिरावट
भोपाल में डेंगू के लार्वा को खत्म करने के लिए मलेरिया विभाग ने गंबूशिया मछलियों का सहारा लिया है। जानिए डेंगू के लक्षण, रोकथाम के उपाय और भोपाल में निशुल्क जाँच केंद्र।
भोपाल : राजधानी भोपाल में मानसून की दस्तक के साथ ही डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है, जिसे देखते हुए मच्छरों के लार्वा पर अब 'जैविक वार' (Biological War) किया जा रहा है। जिला मलेरिया विभाग द्वारा विशेष रूप से 'गंबूशिया' मछलियों को उन जलभराव वाले स्थानों और जल निकायों में छोड़ा जा रहा है, जो मच्छरों के प्रजनन के प्रमुख केंद्र होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। साल 2024 में जहाँ डेंगू के 697 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर मात्र 134 पर आ गया। राहत की बात यह है कि चालू वर्ष में अब तक केवल 49 मामले ही सामने आए हैं।
🧪 गंबूशिया मछली: मच्छरों के खात्मे का प्राकृतिक हथियार
जिला मलेरिया अधिकारी स्मृता नामदेव ने बताया कि, "गंबूशिया मछली एक प्रभावी जैविक नियंत्रण (Biological Control) के रूप में काम करती है। यह स्वभाव से मच्छरों के लार्वा को बड़े चाव से खाती है, जिससे उनकी संख्या को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलती है।" जिन स्थानों पर पानी अस्थायी या स्थायी रूप से जमा रहता है, वहाँ इन मछलियों को छोड़ा जाता है। विभाग के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक करीब 34 हजार गंबूशिया मछलियां विभिन्न जलस्रोतों में छोड़ी जा चुकी हैं, जबकि इससे बीते वर्षों में लगभग 3 लाख से अधिक मछलियां जलाशयों में छोड़ी गई थीं।
📉 डेंगू के मामलों में लगातार गिरावट का सिलसिला
स्मृता नामदेव के अनुसार, "भोपाल में डेंगू की स्थिति पर नियंत्रण पाने में काफी सफलता मिली है। वर्ष 2024 में 697 मरीज मिले थे, जो 2025 में घटकर 134 रह गए, और वर्तमान वर्ष में अब तक केवल 49 मामले ही रिपोर्ट हुए हैं।" स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट कहना है कि मानसून के दौरान मच्छरों के प्रजनन स्थल (Breeding Sites) बढ़ने की पूरी संभावना रहती है, इसलिए एहतियात के तौर पर रोकथाम और जन-जागरूकता अभियान को और अधिक तेज कर दिया गया है।
🏥 भोपाल में 5 केंद्रों पर उपलब्ध है निशुल्क जाँच
अधिकारियों ने जानकारी दी कि डेंगू के संदिग्ध मरीजों की सुविधा के लिए भोपाल में पांच 'सेंटिनल साइट' (Sentinel Sites) चिह्नित की गई हैं। इन केंद्रों पर डेंगू की जाँच पूरी तरह से नि:शुल्क उपलब्ध है:
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गांधी मेडिकल कॉलेज
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सिविल अस्पताल, बैरागढ़
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एम्स (AIIMS)
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बीएमएचआरसी (BMHRC)
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जेपी अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि यदि किसी को तेज बुखार के साथ हाथ-पैर या जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या आँखों के पीछे दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर अपनी जाँच अवश्य कराएं।
⚠️ एडीज मच्छर से बचाव: क्या करें और क्या न करें?
जिला मलेरिया अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा, "एडीज मच्छर मुख्य रूप से साफ पानी में पनपता है और यह दिन के उजाले में काटता है। घरों में रखी खुली टंकियां, मटके, पुराने टायर, फूलदान और ऐसे अन्य बर्तन जिनमें पानी जमा हो सकता है, मच्छरों के लिए सबसे सुरक्षित प्रजनन स्थल बन सकते हैं। इन्हें नियमित रूप से साफ करना और खाली रखना बेहद आवश्यक है।"
विभाग के अनुसार, खुले कंटेनर में जमा साफ पानी में एडीज मच्छर अंडे दे सकता है और महज तीन से पांच दिनों में नए मच्छर तैयार हो जाते हैं। जिन जगहों से पानी हटाना संभव नहीं है, वहाँ पानी में एक-दो चम्मच खाने का तेल डालने या पानी की छलनी से लार्वा को निकालकर सूखे स्थान पर नष्ट करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, मच्छरों से बचने के लिए सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना सबसे कारगर उपाय है।
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