इच्छापुर गांव में अमृत सरोवर से बदली किसानों की तकदीर, 500 हेक्टेयर भूमि को मिल रहा सिंचित पानी

बुरहानपुर के इच्छापुर गांव में अमृत सरोवर के निर्माण से किसानों की पानी की समस्या दूर हो गई है। अब यहाँ 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ हरियाली लौट आई है।

Aug 10, 2026 - 16:34
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इच्छापुर गांव में अमृत सरोवर से बदली किसानों की तकदीर, 500 हेक्टेयर भूमि को मिल रहा सिंचित पानी

जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित इच्छापुर गाँव में सरकार द्वारा बनाए गए 'अमृत सरोवर तालाब' ने किसानों के जीवन में एक नई खुशहाली ला दी है। साल 2022 में सरकार ने इस सूखी पहाड़ी क्षेत्र में अमृत सरोवर तालाब का निर्माण करवाया था। इससे पहले यहाँ बारिश का सारा पानी व्यर्थ बह जाता था, लेकिन अब इन सरोवरों में पानी के ठहरने से क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को करीब 500 हेक्टेयर कृषि भूमि में पर्याप्त पानी मिलने लगा है। यह तालाब अब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि किसानों की मजबूत उम्मीद और ग्रामीण विकास का नया प्रतीक बन चुका है।

🌿 गांवों में लौटी हरियाली, भूजल स्तर में हुआ जबरदस्त सुधार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शुरू किए गए 'गंगा संवर्धन अभियान' के तहत बुरहानपुर जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। ग्राम इच्छापुर के साथ-साथ असीर और इटारिया के अमृत सरोवर भी बारिश के पानी से लबालब भर चुके हैं। इन तालाबों के कारण क्षेत्र का भूजल स्तर (Groundwater Level) तेजी से ऊपर आया है, जिससे किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए बड़ा संबल मिला है और पूरे इलाके में हरियाली फिर से लौट आई है।

🐟 जल संरक्षण का मॉडल बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

तालाब के निर्माण से अब इस क्षेत्र में मछली पालन (Fisheries) की संभावनाएं भी काफी बढ़ गई हैं। इसके अलावा, हजारों घनमीटर पानी का यह भंडारण आने वाले समय के लिए सुरक्षित जल सुरक्षा की नींव बन रहा है। जल संरक्षण का यह सफल मॉडल अब महज़ एक तालाब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक समृद्धि, पर्यावरण की रक्षा और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की एक नई पहचान बन रहा है।

🚰 खत्म हुई दशकों पुरानी पानी की भयंकर किल्लत

इच्छापुर गाँव मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है, जहाँ पिछले कई दशकों से पानी की विकट समस्या के कारण ग्रामीण और किसान खासे परेशान रहते थे। पहले ग्राम पंचायत ने महाराष्ट्र के अंतुर्ली गाँव से पानी का अनुबंध किया था और वहाँ से पाइपलाइन के जरिए पानी लाया जाता था, जिसके लिए पंचायत ने जमीन भी खरीदी थी। हालांकि समय के साथ यह समस्या धीरे-धीरे कम होती गई और अब स्थिति यह है कि पूरे गाँव में प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध है।

📈 महत्वाकांक्षी योजनाओं का असर और आत्मनिर्भर बनता गाँव

अब इच्छापुर गाँव अपनी जल आवश्यकताओं के लिए किसी अन्य क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के चलते गाँव में कई जगह छोटे-छोटे बाँध, तालाब और वाटर रिचार्ज सिस्टम विकसित किए गए हैं। इससे पानी की समस्या का पूरी तरह स्थायी समाधान हो चुका है। वर्तमान में पूरे गाँव में कहीं भी जल संकट नहीं है और ग्रामीणों को पीने के लिए भी शुद्ध व पर्याप्त पानी मिल रहा है।

👩‍🌾 स्व-सहायता समूह की महिलाओं को मिली जल टैक्स वसूली की अहम जिम्मेदारी

इस व्यवस्था की एक खास बात यह है कि ग्राम पंचायत ने जल टैक्स की वसूली की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय स्व-सहायता समूह (Self Help Group) की महिलाओं को सौंपी है। समूह की ये महिलाएं पूरे गाँव में बेहद सक्रिय रूप से शत-प्रतिशत टैक्स की वसूली करती हैं। वहीं, ग्रामीण भी पूरी ईमानदारी से समय पर टैक्स का भुगतान करते हैं, ताकि गाँव में सभी मूलभूत सुविधाएँ सुचारु रूप से चलती रहें।

🍌 हर मौसम में फसलें उगा रहे हैं क्षेत्र के खुशहाल किसान

गाँव के पूर्व सरपंच संजय पवार ने जानकारी देते हुए बताया, "इच्छापुर के किसानों को अमृत सरोवर से अभूतपूर्व लाभ मिला है। पहले इस क्षेत्र में केवल बारिश के मौसम की ही फसलें हो पाती थीं, लेकिन जब से यह सरोवर बना है, तब से किसान हर मौसम में फसलें ले रहे हैं। अब क्षेत्र में केले की फसल का रकबा भी काफी बढ़ गया है और बड़ी मात्रा में भूमि सिंचित होने लगी है।"

स्थानीय किसान अर्जुन चौधरी ने भी अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, "इच्छापुर और आसपास के गाँवों का जलस्तर काफी ऊपर आ गया है। 5 साल पहले तक हम पूरी तरह बारिश पर निर्भर हुआ करते थे, लेकिन इस सरोवर ने हमारे जीवन में खुशहाली ला दी है। यह तालाब लगभग 50 फीट गहरा है और बारिश के पानी से पूरी तरह भरा हुआ है, जिससे भविष्य में भी हमें भरपूर लाभ मिलता रहेगा।"

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