माँ-पुत्र का ऐसा प्रेम, जिसे मृत्यु भी अलग न कर सकी...

माँ-पुत्र का अटूट प्रेम: निधन के बाद भी दो नेत्रदानों ने रोशन कीं दो ज़िंदगियाँ

Jun 15, 2026 - 08:51
0
माँ-पुत्र का ऐसा प्रेम, जिसे मृत्यु भी अलग न कर सकी...

माँ-पुत्र का ऐसा प्रेम, जिसे मृत्यु भी अलग न कर सकी: दो नेत्रदानों ने रोशन कीं दो ज़िंदगियाँ

"वे दुनिया से साथ विदा हुए, लेकिन जाते-जाते दो अनजान ज़िंदगियों में उजाला छोड़ गए..."

मानव जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनकी गहराई शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। माँ और पुत्र का रिश्ता भी ऐसा ही एक पवित्र और अटूट बंधन है। हाल ही में घटी एक अत्यंत मार्मिक घटना ने इस रिश्ते की संवेदनशीलता और अमर प्रेम को फिर से उजागर कर दिया।

 राजुल शर्मा के आकस्मिक निधन की खबर ने परिवार और परिचितों को गहरे सदमे में डाल दिया। पुत्र के असामयिक निधन का दुःख उनकी माताजी श्रीमती किरण शर्मा सहन नहीं कर सकीं और कुछ ही समय बाद उन्होंने भी इस संसार को अलविदा कह दिया। माँ और पुत्र का यह अटूट साथ जीवन की अंतिम यात्रा तक बना रहा। इस हृदयविदारक घटना ने हर उस व्यक्ति की आँखें नम कर दीं, जिसने इसके बारे में सुना।

हालाँकि परिवार पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा था, लेकिन इसी कठिन घड़ी में उन्होंने मानवता और समाजसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो लंबे समय तक प्रेरणा देता रहेगा। परिवार ने माँ और पुत्र—दोनों का नेत्रदान कराने का निर्णय लिया। इस महान पहल के माध्यम से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि और जीवन में नई आशा मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

नेत्रदान को महादान कहा जाता है और इस परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुःख से ऊपर उठकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अद्भुत परिचय दिया। उनके इस निर्णय से न केवल दो लोगों के जीवन में रोशनी पहुँचेगी, बल्कि समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

इस पुण्य कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में मुस्कान ग्रुप का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। तकनीकी एवं समन्वय सेवाओं में जीतू बगानी, नेनिवेदिता गोयल और सुमित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनके प्रयासों से नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से पूर्ण हो सकी।

माँ और पुत्र की यह कहानी केवल प्रेम और संवेदनाओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानवता, सेवा और जीवन के बाद भी दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने की प्रेरणादायक मिसाल है।

दिवंगत आत्माओं को भावपूर्ण श्रद्धांजलि एवं शत्-शत् नमन।यह लेख वेबसाइट, पोर्टल या स्मृति-श्रद्धांजलि प्रकाशन के लिए उपयुक्त शैली में तैयार किया गया है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User