32 साल आश्रम में रहीं 105 साल की गया बाई और बुजुर्ग घनश्याम की अर्थी को अपनों ने नकारा

भोपाल के वृद्धाश्रमों में दो बुजुर्गों के निधन के बाद उनके बेटे-बेटी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। 32 साल से आश्रम में रह रही 105 साल की गया बाई और घनश्याम को अपनों ने ठुकराया।

Aug 10, 2026 - 19:55
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32 साल आश्रम में रहीं 105 साल की गया बाई और बुजुर्ग घनश्याम की अर्थी को अपनों ने नकारा

हाल ही में मुंबई के एक कपड़ा व्यवसायी की हरियाणा के सोनीपत वृद्धाश्रम में मौत के बाद उनकी बेटियों द्वारा अंतिम संस्कार में न पहुँचने का मामला देश भर में सुर्खियों में रहा था। मुंबई की इस घटना में तो बेटियों ने दूरी का बहाना बनाया था, लेकिन अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से इससे भी अधिक झकझोर देने वाले और शर्मनाक दो मामले सामने आए हैं, जहाँ संतानों ने अपने वृद्ध माता-पिता के अंतिम दर्शन करने तक से किनारा कर लिया।

⏳ अपनों का इंतजार करते हुए दुनिया से विदा हो गईं 105 साल की गया बाई

भोपाल के शाहजहांनाबाद स्थित 'आसरा वृद्ध आश्रम' में रहने वाली 105 साल की गया बाई अपनों का रास्ता देखते-देखते इस दुनिया से विदा हो गईं। गया बाई साल 1994 से यानी पिछले 32 सालों से इस आश्रम में रह रही थीं। उन्हें उनकी बहन आश्रम में छोड़कर गई थीं, जिसके बाद कभी कोई सुधि लेने नहीं आया। न्यू मार्केट भोपाल की रहने वाली गया बाई के एक बेटा और एक बेटी हैं, लेकिन 3 अगस्त 2026 को जब उनका निधन हुआ, तो आश्रम प्रबंधक द्वारा सूचना देने के बावजूद उनका बेटा और बेटी अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुँचे।

आश्रम की प्रबंधक समीना मसी ने बताया कि बच्चों को सूचना देने के बावजूद जब कोई नहीं आया, तो आश्रम के लोगों ने ही उनका अंतिम संस्कार किया।

🕊️ इंदौर के घनश्याम ने 'अपना घर' आश्रम में तोड़ा दम, बेटों-बेटियों ने बनाई दूरी

दूसरा मामला भोपाल के ही 'अपना घर' वृद्धाश्रम का है, जहाँ इंदौर के रहने वाले 70 वर्षीय घनश्याम ने 4 अगस्त को अंतिम सांस ली। आश्रम प्रबंधन दो दिनों तक इस उम्मीद में उनके शव को सहेजकर बैठा रहा कि शायद कोई बेटा या बेटी अंतिम संस्कार के लिए पहुँच जाएगी, लेकिन इंतजार का दायरा खत्म नहीं हुआ। आखिरकार पुलिस की मदद से आश्रम प्रबंधन को ही उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा।

💬 "पिता ने हमारे लिए किया ही क्या है?" - संतानों का अजीब तर्क

'अपना घर' आश्रम की संचालिका माधुरी मिश्रा ने बताया कि जब मृतक घनश्याम के परिजनों से संपर्क किया गया, तो उनकी बेटी ने साफ शब्दों में आने से इनकार करते हुए कहा कि उनके पिता ने अपनी सारी संपत्ति बेटों को दे दी थी और उसे कुछ नहीं मिला, इसलिए वह क्यों आए? वहीं, बेटों की तरफ से भी बेहद संवेदनहीन जवाब मिला कि "पिता ने हमारे लिए किया ही क्या है?" इस तरह की घटनाओं ने समाज में लगातार गिरते मानवीय मूल्यों और रिश्तों की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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