हाईकोर्ट के आदेश पर भोपाल में चला बुलडोजर, निजी जमीन से हटाए गए 50 से ज्यादा मकान
भोपाल के नारियल खेड़ा में हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने निजी जमीन से 50 मकानों को बुलडोजर से ढहा दिया। 40 साल से रह रहे निवासी मुआवजे और मोहलत की मांग कर रहे हैं।
राजधानी भोपाल के नारियल खेड़ा क्षेत्र में मंगलवार को प्रशासन ने एक बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया। हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के पालन में, भारी पुलिस बल और नगर निगम की टीम की मौजूदगी में करीब 50 मकानों और अन्य अवैध निर्माणों को बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया। यह जमीन निजी बताई जा रही है, जिस पर लोग पिछले करीब 40 वर्षों से अपना आशियाना बनाकर रह रहे थे। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात रहा।
📢 ग्रामीणों का आरोप: नहीं मिला पर्याप्त नोटिस, बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे आए परिवार
बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। रहवासियों का आरोप है कि उन्हें प्रशासन द्वारा बहुत कम समय पहले सूचना दी गई थी। स्थानीय निवासी फरहा और शकुंतला अहिरवार का कहना है कि उनके पास बिजली, पानी के कनेक्शन और संपत्ति कर जमा करने तक के दस्तावेज मौजूद हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को कम से कम तीन-चार महीने का समय देना चाहिए था या उचित मुआवजा देना चाहिए था। इस समय राजधानी में हो रही बारिश के बीच मकान ढहने से परिवारों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के सामने रहने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
📜 क्या है जमीन विवाद का पूरा मामला?
याचिकाकर्ता उपासना जौहरी के अनुसार, यह जमीन उनके ससुर और सेवानिवृत्त जज भगवान दास सहाय ने 1955 में खरीदी थी। उनका आरोप है कि 1988 के बाद से भू-माफियाओं ने प्रशासन के साथ मिलीभगत कर इस जमीन पर कब्जा करना शुरू किया और बिना किसी वैध रजिस्ट्री या पट्टे के लोगों को जमीन बेच दी। मामले की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 5 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट के कब्जे हटाने के आदेश को यथावत रखा। याचिकाकर्ता का दावा है कि नारियल खेड़ा की इस 78 डिसमिल निजी जमीन पर 48 से अधिक मकान अवैध रूप से बनाए गए थे, जिस पर अंततः प्रशासन ने कोर्ट के अवमानना नोटिस मिलने के बाद कार्रवाई की है।
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