अमेरिका-ईरान तनाव से क्रूड ऑयल 90 डॉलर के पार, एनर्जी शेयरों में तूफानी तेजी लेकिन बाकी बाजार धड़ाम
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। एनर्जी शेयरों में तेजी आई है, जबकि अन्य शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जारी उथल-पुथल के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में जोरदार तेजी आ गई है और ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। जहाँ एक तरफ इस महंगे तेल ने पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ा दी है, वहीं शेयर बाजार में एनर्जी सेक्टर की कंपनियों के लिए यह स्थिति किसी लॉटरी से कम साबित नहीं हो रही है। मंगलवार को एनर्जी शेयरों ने नया रिकॉर्ड स्तर छू लिया, जबकि बाकी का पूरा शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया।
💰 शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल के मुनाफे में भारी बढ़ोतरी, निचले स्तर से 21% तक उछले एनर्जी शेयर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, एसएंडपी 500 का एनर्जी सेक्टर इंडेक्स 1.8 प्रतिशत की छलांग लगाकर अपने इतिहास के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंच गया है। जुलाई में जिन एनर्जी शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी, वे अब अपने निचले स्तर से 21 प्रतिशत तक उछल चुके हैं। दुनिया की दिग्गज तेल उत्पादक कंपनियां जैसे शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल जबरदस्त मुनाफा कमा रही हैं। दूसरी तिमाही में शेवरॉन की कमाई में 240 प्रतिशत और एक्सॉनमोबिल के मुनाफे में 115 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, रिफाइनरी कंपनियों को भी सप्लाई संकट का सीधा लाभ मिल रहा है।
⚠️ युद्ध लंबा खिंचने की आशंका और महंगाई के डर से अमेरिकी शेयर बाजार में बिकवाली
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में चल रहा यह तनाव इतनी आसानी से खत्म होने वाला नहीं है, जिससे आने वाले लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर रहने की आशंका है। इसी बीच, महंगे कच्चे तेल के कारण ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ने के डर से वैश्विक शेयर बाजारों में खौफ का माहौल बन गया है। मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जहाँ एसएंडपी 500 में 0.7 फीसदी और नैस्डैक में 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। एनवीडिया और इंटेल जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी बुरी तरह लुढ़क गए, जबकि अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड जून 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
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