डीआरडीओ ने पहली बार निजी कंपनियों से मांगे मिसाइल और बम बनाने के लिए आवेदन, रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव

डीआरडीओ ने पहली बार निजी क्षेत्र की कंपनियों से मिसाइल और रणनीतिक हथियार बनाने के लिए आवेदन मांगे हैं। 'डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर' मॉडल के तहत देश में बढ़ेगा रक्षा उत्पादन।

Aug 19, 2026 - 13:37
0
डीआरडीओ ने पहली बार निजी कंपनियों से मांगे मिसाइल और बम बनाने के लिए आवेदन, रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। अब तक जिन घातक रणनीतिक हथियारों और मिसाइलों का निर्माण केवल सरकारी कंपनियां करती थीं, उन्हें अब देश की प्राइवेट कंपनियां भी बनाएंगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पहली बार मिसाइल और बम वेपन सिस्टम बनाने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों से आवेदन मांगे हैं। यह कदम देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को एक नई रफ्तार देगा। इस फैसले से सेना को आधुनिक हथियार और मिसाइलें ज्यादा तेजी से और बड़ी मात्रा में मिल सकेंगी।

📋 डीआरडीओ ने जारी किया 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट', अग्नि सीरीज और न्यूक्लियर हथियारों के नए वैरिएंट्स पर होगा काम

DRDO के मिसाइल एवं रणनीतिक सिस्टम विभाग ने भविष्य के अहम रक्षा प्रोजेक्ट्स के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसके तहत अग्नि सीरीज जैसी मारक मिसाइलों से लेकर पनडुब्बी से लॉन्च होने वाले न्यूक्लियर हथियारों के नए वैरिएंट्स तैयार किए जाएंगे। अब तक यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) जैसे सरकारी उपक्रमों के पास थी। नई योजना के तहत टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और सोलर एयरोस्पेस एंड डिफेंस जैसी स्थापित निजी कंपनियों को भी इस अहम काम में साझीदार बनाया जाएगा।

🔍 रक्षा ठेके पाने के लिए कड़े मानक: इंडस्ट्रियल लाइसेंस और वित्तीय योग्यता होगी अनिवार्य

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना किसी भी कंपनी के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि DRDO ने इसके लिए बेहद कड़े तकनीकी एवं वित्तीय मानक तय किए हैं। शॉर्टलिस्ट होने के लिए कंपनियों के पास रक्षा निर्माण का वैध इंडस्ट्रियल लाइसेंस और विस्फोटकों के रखरखाव के लिए PESO लाइसेंस होना अनिवार्य है। इसके अलावा, कंपनी का न्यूनतम टर्नओवर और नेटवर्थ प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत के 5% से अधिक होनी चाहिए। केवल मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों को ही इसमें प्राथमिकता दी जाएगी।

🏭 'डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर' मॉडल से तय होगी भारी उत्पादन क्षमता

इस पूरी नई व्यवस्था को ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर’ मॉडल के तहत लागू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत हर प्रोजेक्ट के लिए कम से कम दो कंपनियों का चयन होगा, जो पहले DRDO के साथ मिलकर टेस्टिंग के लिए प्रोटोटाइप तैयार करेंगी। सफल परीक्षण के बाद इन्हीं कंपनियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन का जिम्मा मिलेगा। गुणवत्ता में कोई चूक न हो, इसके लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति कंपनियों की फैक्ट्रियों का बारीकी से निरीक्षण कर उनकी तकनीकी क्षमता और बुनियादी ढांचे का कड़ाई से आकलन करेगी।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User