मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की दो टूक, कहा—धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ के आधार पर नहीं मांग सकते समानता का अधिकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती परीक्षा 2025 में अपात्र अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ पर समानता का अधिकार नहीं मांग सकते।

Aug 20, 2026 - 16:09
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की दो टूक, कहा—धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ के आधार पर नहीं मांग सकते समानता का अधिकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अपात्र अभ्यर्थियों की सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की है कि धोखाधड़ी से प्राप्त किए गए किसी भी लाभ के आधार पर बाद में समानता के सिद्धांत के तहत राहत की मांग नहीं की जा सकती। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि नियमों के विरुद्ध जाकर गलत तरीके से फायदा उठाने वालों को कानूनी संरक्षण नहीं मिल सकता।

📉 5271 अभ्यर्थी ही थे बोनस के हकदार, साढ़े नौ हजार आवेदकों को लगा झटका

प्रकरण के अनुसार, नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया व अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को दिए जाने वाले 5 प्रतिशत बोनस अंकों को चुनौती दी गई थी। भर्ती नियमों के मुताबिक केवल विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को ही यह बोनस मिलना था। 13089 पदों के लिए जारी मेरिट सूची में लगभग 14964 अभ्यर्थियों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक हासिल कर लिए थे, जबकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वास्तव में केवल 5271 अभ्यर्थी ही इसके वास्तविक पात्र थे। इस प्रकार करीब 9500 आवेदकों को बड़ा झटका लगा है।

🚫 गलत जानकारी देना और परिणाम के बाद सुधार मांगना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि ऑनलाइन आवेदन में केवल 'हां' का विकल्प चुन लेने मात्र से बिना दस्तावेज सत्यापन के बोनस अंक दे दिए गए थे, जिससे वास्तविक और योग्य अभ्यर्थियों की मेरिट सूची बुरी तरह प्रभावित हुई। कोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थियों को सुधार के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए थे, लेकिन परीक्षा परिणाम आने के बाद जब उन्हें पता चला कि बिना बोनस के भी वे मेरिट में आ रहे हैं, तब उन्होंने अपनी गलती को 'भूलवश' बताकर सुधार की मांग की, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। अदालत ने दो टूक कहा कि गलत जानकारी देकर बोनस अंक प्राप्त करना सीधे तौर पर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

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