गुजरात के भावनगर शराब कांड में उज्जैन का कनेक्शन, आबकारी कार्यालय पर कांग्रेस का प्रदर्शन
गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में उज्जैन का नाम सामने आया है। इसके विरोध में कांग्रेस ने उज्जैन आबकारी कार्यालय का घेराव किया।
साल 2020 में जहरीली शराब पीने से हुई 14 से अधिक मौतों के दर्दनाक हादसे से दहल चुका उज्जैन शहर एक बार फिर इसी तरह के गंभीर मामले में चर्चा में आ गया है। पड़ोसी राज्य गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई 9 लोगों की मौत और कई लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के मामले की जाँच में उज्जैन का कनेक्शन सामने आया है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उज्जैन में अब भी अवैध और जहरीली शराब का काला कारोबार संचालित हो रहा है, जिस पर स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की पकड़ ढीली साबित हो रही है।
📦 गुजरात पुलिस की जाँच में सामने आया उज्जैन से शराब सप्लाई का मामला
गुजरात के भावनगर में हुई इन मौतों के बाद जब पुलिस ने गहराई से छानबीन की, तो सामने आया कि परोसी गई नकली और जहरीली शराब में खतरनाक मात्रा में 'मेथनॉल' (Methanol) मिला हुआ था। गुजरात पुलिस के अनुसार, इस अवैध नेटवर्क का संचालन करने वालों में रईस और उसका सहयोगी जुबेर शामिल हैं, जिनमें से मुख्य आरोपी रईस को मध्य प्रदेश के उज्जैन से पकड़े जाने की सूचना है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उज्जैन से शराब की कुल 28 पेटियों की खेप गुजरात पहुँचने की जानकारी मिली थी, जिसमें से 15 पेटियां तो बरामद कर ली गईं, लेकिन 13 पेटियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिसके चलते दूसरे राज्यों तक जाँच की सुई घूम गई है।
🏛️ कांग्रेस का आबकारी कार्यालय पर प्रदर्शन और 2020 की डरावनी यादें
इस सनसनीखेज मामले में उज्जैन का नाम आने के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पारा भी गर्मा गया है। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक महेश परमार और शहर अध्यक्ष सहित तमाम पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने उज्जैन जिला आबकारी कार्यालय का पुरजोर घेराव किया। कांग्रेस नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गुजरात में पकड़ी गई शराब की पेटियों पर उज्जैन आबकारी विभाग की सील होना यह साबित करता है कि यह खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। उधर, सहायक आबकारी अधिकारी मनीष बर्वे का कहना है कि दस्तावेजों, जब्त पेटियों की सील, होलोग्राम और सप्लाई चेन की पूरी जाँच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बता दें कि अक्टूबर 2020 में भी उज्जैन में अवैध शराब के सेवन से 14 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जिसमें पुलिसकर्मियों की मिलीभगत भी उजागर हुई थी।
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