विवादित 75 हजार की राशि एफडी में रखकर चालू करें बैंक खाता, ग्वालियर बेंच का आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने साइबर अपराध के मामले में फ्रीज किए गए बैंक खाते को अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। विवादित राशि को एफडी में रखा जाएगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने साइबर अपराध की जाँच के सिलसिले में फ्रीज किए गए एक बैंक खाते को अनफ्रीज करने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि खाते में मौजूद पूरी राशि को रोकने के बजाय केवल विवादित 75,000 रुपये की राशि को अलग से सावधि जमा (FD) में रखा जाएगा। इसके साथ ही पुलिस को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन महीने के भीतर सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट से इस राशि के संबंध में आवश्यक आदेश प्राप्त करें, अन्यथा तय समय सीमा के बाद याचिकाकर्ता को वह राशि भी निकालने की अनुमति मिल जाएगी। न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने 'शिव कुमार अग्निहोत्री बनाम पुलिस उपायुक्त एवं अन्य' मामले में सोमवार को यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) खाते पर लगाए गए साइबर क्राइम डेबिट फ्रीज को हटाने की गुहार लगाई थी।
🏛️ हाईकोर्ट ने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा—पूरी बैंकिंग गतिविधि को रोकना उचित नहीं
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शिव कुमार अग्निहोत्री के वकील ने अदालत के समक्ष पूर्व के कुछ निर्णयों का हवाला दिया। मामलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि यदि किसी बैंक खाते में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी कोई छोटी राशि विवादित है, तो उसके आधार पर पूरे बैंक खाते और संपूर्ण बैंकिंग गतिविधि को अनिश्चितकाल के लिए ठप करना पूरी तरह अनुचित है। ऐसी परिस्थितियों में केवल विवादित राशि को सुरक्षित कर बाकी खाते के संचालन की अनुमति दी जा सकती है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माना कि इस मामले में भी पूर्व के न्यायिक सिद्धांतों और दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए, जिससे नागरिकों को अनावश्यक वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े।
🕒 पुलिस को तीन महीने में मजिस्ट्रेट से आदेश लेने होंगे, अन्यथा याचिकाकर्ता निकाल सकेगा राशि
अदालत ने अपने आदेश में निर्देश दिया है कि पुलिस या साइबर अपराध एजेंसी द्वारा विवादित बताई गई 75 हजार रुपये की राशि को बैंक में अलग से एफडी के रूप में सुरक्षित रखा जाए। यह राशि तभी निकाली जा सकेगी जब सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश पारित किया जाएगा। हाईकोर्ट ने जाँच एजेंसी को यह भी हिदायत दी है कि वे निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत तीन महीने के भीतर मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करें। यदि पुलिस इस अवधि में ऐसा करने में विफल रहती है, तो याचिकाकर्ता पुलिस एजेंसी को औपचारिक सूचना देकर उस राशि को भी अपने खाते से निकाल सकेगा। इस प्रकार हाईकोर्ट ने एसबीआई बैंक खाते से डेबिट फ्रीज हटाने का निर्देश देते हुए इस याचिका का सफलतापूर्वक निराकरण कर दिया।
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