चंबल नदी में बनेगा मध्य प्रदेश का पहला 6-लेन साइलेंट केबल ब्रिज; डॉल्फिन और घड़ियालों को शोर से मिलेगी मुक्ति
मुरैना में चंबल नदी पर MP का पहला 6-लेन साइलेंट केबल ब्रिज बनेगा। 1600 मीटर लंबे इस ब्रिज में बिना पिलर के केबल और विशेष साउंड-लाइट सिस्टम की व्यवस्था होगी।
मुरैना। चंबल नदी में रहने वाले दुर्लभ जलीय जीवों की शांति और उनका प्राकृतिक आवास अब प्रभावित नहीं होगा। चंबल नदी में संरक्षित डॉल्फिन और घड़ियाल निवास करते हैं, जिन्हें अत्यधिक शांति पसंद होती है।
अक्सर थोड़ी सी भी शांति भंग होने या मानवीय हलचल बढ़ने पर ये जीव अपना स्थान बदलकर दूसरी जगह चले जाते हैं। ऐसे में इन जीवों की शांति बनाए रखने और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का प्राकृतिक पर्यावरण बेहतर बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जिले की चंबल नदी पर मध्य प्रदेश की सीमा का पहला 6-लेन साइलेंट केबल ब्रिज (Silent Cable Bridge) बनने जा रहा है।
🔇 1600 मीटर लंबे ब्रिज में लगेंगे विशेष साउंड व लाइट बैरियर: पानी तक नहीं पहुंचेगा गाड़ियों का शोर
करीब 1,600 मीटर (1.6 किमी) लंबे इस अत्याधुनिक पुल के निर्माण में जलीय जीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
इस ब्रिज में विशेष साउंड इंसुलेशन सिस्टम और साउंड बैरियर लगाए जाएंगे, जिससे पुल के ऊपर से गुजरने वाले भारी वाहनों का शोर नीचे चंबल नदी में तैर रहे जीवों तक न पहुंचे। इसके अलावा, वाहनों की तेज हेडलाइट्स की रोशनी भी सीधे पानी की सतह तक न पहुंचे, इसके लिए विशेष लाइट बैरियर भी स्थापित किए जाएंगे। गौरतलब है कि चंबल नदी पर 6-लेन केबल ब्रिज इससे पहले राजस्थान के कोटा में बना हुआ है, लेकिन वह पूरा ढांचा राजस्थान की सीमा में आता है। मध्य प्रदेश की भौगोलिक सीमा के लिहाज से यह राज्य का पहला साइलेंट केबल स्टे ब्रिज होगा।
🌧️ मानसून बीतते ही शुरू होगा निर्माण कार्य: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और वन विभाग से मिली मंजूरी
उल्लेखनीय है कि इस महत्वकांक्षी साइलेंट केबल ब्रिज के निर्माण के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान वन विभाग सहित केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से सभी आवश्यक प्रशासनिक और पर्यावरणीय अनुमतियां (Clearances) मिल चुकी हैं।
विभाग के अनुसार, इसका निर्माण कार्य बरसात का मौसम (मानसून) समाप्त होते ही तेजी से शुरू कर दिया जाएगा।
🌉 नदी के बहते पानी में नहीं बनेगा एक भी पिलर: केबल और किनारों के खंभों पर टिका रहेगा पूरा ढांचा
जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास और नदी के पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए नदी के बहते पानी के भीतर किसी भी प्रकार की खुदाई नहीं की जाएगी और न ही पानी के बीच में कोई पिलर (खंभा) बनाया जाएगा।
पुल का पूरा भारी-भरकम ढांचा नदी के दोनों किनारों पर बनाए जाने वाले मुख्य पायलों (Pylons) और हाई-टेंशन केबल के सहारे ही हवा में टिका रहेगा।
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