सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़ा फैसला, व्यक्तिगत हित से ऊपर सार्वजनिक हित, बुलडोजर और पोकलेन से हटाए जा रहे बाधक निर्माण
उज्जैन में महाकाल मार्ग चौड़ीकरण का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट से स्टे हटने के बाद नगर निगम और प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है।
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से महाकाल चौराहा तक के 200 मीटर लंबे और 15 मीटर चौड़े मार्ग को अब 24 मीटर चौड़ा करने की प्रशासनिक बाधाएं पूरी तरह दूर हो चुकी हैं। बीते 28 सितंबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से इस मामले में मिला स्थगन आदेश (स्टे) खारिज कर दिया गया, जिसके तुरंत बाद नगर निगम और जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया। अदालत के फैसले के बाद गुरुवार सुबह से ही भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मार्ग के चौड़ीकरण और बाधक निर्माणों को हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इससे पहले मंगलवार को निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर 39 प्रभावित परिवारों के मकानों, दुकानों और होटलों के दायरे में लाल निशान लगाए थे और बुधवार को सभी को 24 घंटे के भीतर जगह खाली करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया था।
🗺️ मास्टर प्लान-2035 के तहत हो रहा है कायाकल्प, सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए सड़क को किया जा रहा है चौड़ा
स्मार्ट सिटी कंपनी और नगर निगम द्वारा उज्जैन मास्टर प्लान-2035 के तहत महाकाल क्षेत्र में यातायात को पूरी तरह सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। वर्तमान में यह महत्वपूर्ण मार्ग केवल 15 मीटर चौड़ा है, जिसे बढ़ाकर 24 मीटर किया जाना प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2021 में राज्य सरकार ने महाकाल मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 8 गुना बढ़ाने और आसपास के संपर्क मार्गों को चौड़ा करने की योजना को मंजूरी दी थी। हालांकि, अन्य हिस्सों में काम तेजी से आगे बढ़ा, लेकिन इस मार्ग पर प्रभावितों के विरोध और अदालती स्टे के कारण कार्रवाई रुकी हुई थी। अब रोक हटने के बाद प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।
⚖️ हाईकोर्ट की विशेष टिप्पणी—व्यक्तिगत हित से ऊपर है व्यापक सार्वजनिक हित, सिंहस्थ के लिए मार्ग चौड़ाई जरूरी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट टिप्पणी की है कि आगामी सिंहस्थ 2028 के आयोजन को देखते हुए यह सड़क चौड़ीकरण कार्य तत्काल रूप से आवश्यक है। अदालत ने कहा कि यह क्षेत्र महाकाल मार्ग के अत्यंत समीप है और आसपास के अन्य भू-स्वामियों के निर्माण पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। इसलिए इस मामले में किसी भी व्यक्तिगत हित के मुकाबले व्यापक सार्वजनिक हित और प्रशासनिक जरूरतें अधिक महत्वपूर्ण हैं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए थे कि यदि याचिकाकर्ता खुद निर्माण नहीं हटाते हैं, तो संबंधित अधिकारी विधि अनुसार कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
🛑 प्रभावित दुकानदारों और निवासियों में मचा हड़कंप, रोजगार छिनने की चिंता जताकर मार्ग को 18 मीटर करने की मांग
दूसरी ओर, इस कार्रवाई से वर्षों से यहां निवास कर रहे भू-स्वामियों, व्यापारियों और किरायेदारों में भारी हड़कंप और मायूस माहौल है। प्रभावित लोगों का कहना है कि वे शहर या मंदिर के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सड़क को 24 मीटर चौड़ा करने से उनके आशियाने और पुश्तैनी रोजगार पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। व्यापारियों ने मांग की है कि यदि मार्ग को 24 मीटर के बजाय 18 मीटर चौड़ा किया जाए, तो भवनों का नुकसान कम होगा और उनकी रोजी-रोटी भी बच सकेगी। इसके बावजूद, अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बाद प्रशासन ने पोकलेन और बुलडोजर की मदद से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू कर दिया है।
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