सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद भोपाल में रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से जारी हैं व्यावसायिक गतिविधियां, नगर निगम की कार्रवाई सुस्त

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद भोपाल के रिहायशी इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की कार्रवाई सुस्त है। सील दुकानें फिर से खुलने लगी हैं।

Oct 01, 2026 - 11:37
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सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद भोपाल में रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से जारी हैं व्यावसायिक गतिविधियां, नगर निगम की कार्रवाई सुस्त

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से संचालित हो रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और भवन निर्माण नियमों के गंभीर उल्लंघनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद नगर निगम की कार्रवाई अभी तक जमीन पर नजर नहीं आ रही है। उच्चतम न्यायालय ने गत 22 सितंबर को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मौजूदा मास्टर प्लान और भवन उपनियमों के दायरे में रहकर सख्त कार्रवाई की जाए। इस ऐतिहासिक आदेश को लगभग एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद निगम प्रशासन की ओर से शहर में कोई बड़ा या प्रभावी अभियान शुरू नहीं किया गया है, जिससे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

🔒 सील होने के कुछ ही घंटों बाद दोबारा खुलने लगे प्रतिष्ठान, पंचनामा तैयार होने के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा कारोबार

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सबसे लचर हालात उन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के हैं, जिन्हें नगर निगम ने खुद अपनी देखरेख में बंद कराकर मौके पर पंचनामा तैयार किया था। इनमें से भी एक बहुत बड़ा हिस्सा अब दोबारा धड़ल्ले से संचालित होने लगा है। यानी जिन दुकानों और व्यावसायिक परिसरों के कागजों में सील होने और बंद होने का दावा निगम द्वारा किया गया था, वे बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के फिर से खुल चुके हैं। रहवासियों का कहना है कि कागजी कार्रवाई और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क साफ दिखाई दे रहा है।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट में उठी थीं सीलिंग हटाने और मनमाने तरीके से दोबारा दुकानें खोलने की गंभीर शिकायतें

बीती 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भोपाल के प्रभावित रहवासियों की ओर से शिकायतों का हवाला दिया गया था। कोर्ट को बताया गया था कि शहर में कई प्रतिष्ठानों को दिन के वक्त अमले द्वारा सील तो कर दिया जाता है, लेकिन शाम ढलते ही वे फिर से खोल दिए जाते हैं। कई मामलों में तो सीलिंग के कुछ ही घंटों या दिनों बाद बिना किसी नए कानूनी घटनाक्रम, कारण बताओ नोटिस के जवाब या सक्षम अधिकारी के निर्णय के परिसरों को दोबारा खोल दिए जाने के मामले भी सामने आए थे। अदालत ने इन शिकायतों को बेहद गंभीरता से लेते हुए रिकॉर्ड पर लिया था और स्पष्ट किया था कि सीलिंग के निर्देशों का पालन सख्ती से हो तथा अधिकारी 'पिक एंड चूज' (चुनिंदा कार्रवाई) की नीति से दूर रहें।

📋 मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी होने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई का इंतजार, रहवासियों में बढ़ रही है नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट की इस महत्वपूर्ण सुनवाई के ठीक बाद प्रदेश सरकार की ओर से नया मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट भी जारी किया जा चुका है। हालांकि, नगर निगम प्रशासन को मौजूदा नियमों और अदालत के निर्देशों के मुताबिक ही जमीनी कार्रवाई को अंजाम देना है। इसके बावजूद शहर के आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से फलफूल रही व्यावसायिक दुकानों की जांच, उनका चिन्हांकन और उन पर कानूनी शिकंजा कसने को लेकर निगम की सुस्त रफ्तार शहरवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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