नवाब हमीदुल्ला खान के बुलावे पर 1929 में भोपाल आए थे महात्मा गांधी, राहत मंजिल में रुके थे बापू
महात्मा गांधी की 96 साल पुरानी भोपाल यात्रा से जुड़े दिलचस्प इतिहास और बेनजीर ग्राउंड को स्मारक बनाने की मांग पर विशेष रिपोर्ट। जानिए कैसे भोपाल आए थे बापू।
महात्मा गांधी के नवाबी रियासत भोपाल आने की कहानी बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक है। बापू देश की कई प्रिंसली स्टेट्स का दौरा कर चुके थे, लेकिन भोपाल का नंबर काफी बाद में आया। भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खां ने महात्मा गांधी को भोपाल बुलाने के लिए कड़े प्रयास किए थे और उनके फिजीशियन डॉ. एमए अंसारी को भोपाल रियासत का ऑफिशियल डॉक्टर तक बना लिया था। आखिरकार 96 वर्ष पहले यानी 1929 में बापू की यह ऐतिहासिक भोपाल यात्रा संभव हो पाई थी, जिससे जुड़े कई रोचक तथ्य आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।
🏡 तीन दिन खादी से सजी 'राहत मंजिल' में रुके थे बापू, बेनजीर मैदान में हुई थी ऐतिहासिक जनसभा
इतिहासकार आलोक गुप्ता के अनुसार, बापू 8 से 10 सितंबर 1929 तक भोपाल में रहे थे और उस दौरान वे अहमदाबाद पैलेस से लगी हुई राहत मंजिल इमारत में ठहरे थे, जिसे विशेष रूप से खादी से सजाया गया था। इस यात्रा के दौरान बापू के साथ कस्तूरबा गांधी (बा) और मीरा बेन भी मौजूद थीं। 10 सितंबर 1929 को बेनजीर ग्राउंड पर बापू की एक विशाल जनसभा आयोजित हुई थी। वर्तमान में इतिहासकार और स्थानीय लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि बापू की इस यात्रा की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिए बेनजीर मैदान को एक भव्य स्मारक के रूप में विकसित किया जाए।
🚆 गोपनीय रखी गई थी बापू की रेल यात्रा, 1933 में हरिजन यात्रा के दौरान भी भोपाल रुके थे महात्मा गांधी
यह भी दिलचस्प है कि नवाब हमीदुल्ला खां की कोशिश थी कि बापू की भोपाल यात्रा और उनके प्रस्थान का समय पूरी तरह गोपनीय रखा जाए। 10 सितंबर को यात्रा समाप्त होने के बाद जब बापू लौट रहे थे, तो रास्ते में गुजराती मोढ समाज ने हरिजन फंड के लिए उन्हें 501 रुपये की बड़ी राशि भेंट की थी। इसके अलावा, साल 1933 में अपनी हरिजन यात्रा के दौरान जब बापू ट्रेन से गुजर रहे थे, तब वे कुछ देर के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर भी रुके थे, जहां प्रभात फेरी निकालने वालों और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी।
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