महात्मा गांधी के अस्थि विसर्जन वाले ताप्ती नदी के सतियारा घाट की हालत दयनीय, बदहाल पड़ा है स्मारक स्थल
बुरहानपुर के सतियारा घाट पर महात्मा गांधी की अस्थियां विसर्जित की गई थीं, लेकिन आज यह ऐतिहासिक स्मारक उपेक्षा का शिकार है। जानिए पूरी खबर।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की जिस ताप्ती नदी के सतियारा घाट पर देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अस्थियों का विसर्जन किया गया था, आज वह ऐतिहासिक स्थल बेहद दयनीय स्थिति में पहुंच चुका है। वर्तमान स्थिति यह है कि घाट के किनारे दूर-दूर तक पानी नजर नहीं आता, जिसके कारण दिवंगतजनों के परिजन यहां अस्थि विसर्जन तक नहीं कर पा रहे हैं। बापू की पावन स्मृति में यहां एक स्मारक स्थल का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज यह पूरी तरह से बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो चुका है।
🏛️ बापू के स्मारक पर साफ-सफाई तक नहीं: जर्जर बाउंड्रीवाल, टूटा ओटला और शिलालेख न होने से मायूस हो रहे लोग
2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर जब श्रद्धांजलि देने लोग सतियारा घाट पहुंचे, तो वहां की बदहाली देखकर वे बेहद आहत हुए। समाजसेवियों और गांधीवादी लोगों का कहना है कि स्मारक की बाउंड्रीवाल और ओटला पूरी तरह जर्जर हो चुका है, और यहां तक कि कोई शिलालेख या सूचना पटल भी नहीं लगाया गया है। सूचना के अभाव में कई स्थानीय और बाहरी पर्यटक इस पवित्र स्थल तक चाहकर भी नहीं पहुंच पाते हैं। स्थानीय लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि यहां नियमित सफाई कराई जाए और सही जानकारी के लिए बोर्ड लगाए जाएं।
⏳ साल में सिर्फ दो दिन याद आते हैं बापू: ताप्ती सेवा समिति ने नगर निगम से ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित करने की लगाई गुहार
ताप्ती सेवा समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा बापू को साल में केवल दो बार यानी उनकी जन्म जयंती और पुण्यतिथि पर ही याद किया जाता है, जबकि बाकी पूरे साल इस ऐतिहासिक स्थल को भुला दिया जाता है। ताप्ती के सतियारा घाट की इस बदहाली से महात्मा गांधी के विचारों को मानने और समझने वाले लोगों में गहरा दुख है। लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि इस धरोहर को सहेजने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।
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