धार जिले में कम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, रबी फसल में गेहूं की जगह चने की बोवनी पर जोर

धार जिले में इस साल मानसून की बेरुखी के चलते पिछले साल की तुलना में 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जलसंकट और रबी फसलों पर मंडराते खतरे की पूरी खबर।

Oct 03, 2026 - 17:38
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धार जिले में कम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, रबी फसल में गेहूं की जगह चने की बोवनी पर जोर

मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में इस साल मानसून की बेरुखी ने किसानों और आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के सबसे कम बारिश वाले जिलों में मध्य प्रदेश के 10 जिले शामिल हैं, जिनमें धार भी एक प्रमुख नाम है। इस मानसून सीजन में धार जिले में अब तक करीब 6902.8 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 11,973.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी। साफ है कि पिछले साल की तुलना में इस बार जिले में लगभग 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

🌱 गेहूं की जगह चने की फसल पर जोर देने लगे किसान: तालाबों और ट्यूबवेलों का जलस्तर घटने से रबी फसल पर संकट

कम बारिश का सीधा असर जिले के जल स्रोतों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। कई तालाब पूरी तरह नहीं भर पाए हैं और ट्यूबवेल भी अभी से कमजोर पड़ने लगे हैं। किसान अनमोल पाटीदार का कहना है कि गेहूं की फसल में ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जबकि चने की फसल कम पानी में तैयार हो जाती है। इसे देखते हुए कई किसान सोयाबीन की कटाई के बाद इस बार गेहूं के बजाय चने की खेती पर ज्यादा फोकस करने की तैयारी कर रहे हैं।

💧 आने वाले दिनों में शहरी पेयजल पर भी मंडरा रहा है खतरा: किसान संघ ने सरकार से की सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

किसान संघ के पदाधिकारी राजेंद्र शर्मा ने चेतावनी दी है कि कम बारिश का असर केवल खेती-किसानी पर ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में शहरी क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ेगा। इस स्थिति को देखते हुए किसानों और आम नागरिकों को आगामी गर्मी के मौसम में भारी पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। किसान संगठनों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि जलसंकट की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं और जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने पर विचार किया जाए।

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