रातों-रात अमीर बनने की चाहत में बने अपराधी; विशाखापत्तनम और मैसूर से जुड़े हिमांशु भाऊ गैंग के तार
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने विदेश में बैठे गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के दो मुख्य लॉजिस्टिक प्रोवाइडर्स को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी आईडी, मनी ट्रेल और हथियारों की सप्लाई करते थे।
नई दिल्ली। कम कमाई, गलत संगत और रातों-रात अमीर बनने की चाहत… अपराध की दुनिया का यह ऐसा दलदल है, जिसमें हरियाणा और यूपी के दो युवा धंसते चले गए। विदेश में बैठकर दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में खौफ का साम्राज्य चलाने वाले कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के इशारे पर काम करने वाले दो मुख्य लॉजिस्टिक प्रोवाइडर्स को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने धर दबोचा है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के पसौंडा निवासी 25 वर्षीय मुर्सलीन उर्फ गुल्लू और भिवानी (हरियाणा) निवासी 20 वर्षीय नवीन के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से एक अवैध पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इस मामले की जांच में सामने आया है कि कैसे विदेश में बैठा गैंगस्टर भारत के अलग-अलग राज्यों से भटके हुए युवाओं को अपने जाल में फंसाकर उनसे लॉजिस्टिक, मनी ट्रेल और रेकी जैसे गैरकानूनी काम करवा रहा था।
🌐 कैसे काम करता था हिमांशु भाऊ का ‘लॉजिस्टिक व मनी नेटवर्क’?
हिमांशु भाऊ गैंग का कामकाज किसी कॉर्पोरेट सिंडिकेट की तरह बेहद संगठित और सुनियोजित था, जिसमें हर गुर्गे की भूमिका पहले से तय होती थी। स्पेशल सेल की नॉर्दर्न रेंज (इंस्पेक्टर अनुज नौटियाल, चंदन कुमार और एसीपी राहुल कुमार सिंह की टीम) की तफ्तीश में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
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विशाखापत्तनम से मैसूर तक ‘सॉफ्ट टारगेट’ की तलाश: जब गैंग के मुख्य शूटर दिल्ली-एनसीआर में किसी बड़ी वारदात (जैसे रंगदारी या हत्या) को अंजाम देकर दूसरे राज्यों में छिपने जाते थे, तो वे वहां स्थानीय स्तर पर मजदूरी या छोटे-मोटे काम करने वाले युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे।
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मुर्सलीन और नवीन की एंट्री: मुर्सलीन विशाखापत्तनम में पेंटर का काम करता था, जहाँ जनवरी 2026 में छिपे गैंग के शूटरों ने उसे अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और पैसों की चमक दिखाकर अपने पाले में कर लिया। वहीं, 9वीं फेल नवीन मैसूर में बढ़ई का काम करता था और पैसों के लालच में इस आपराधिक नेटवर्क से जुड़ गया।
🆔 फर्जी आईडी, होटल बुकिंग और हथियारों की डिलीवरी का जिम्मा
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फर्जी पहचान पत्र: मुर्सलीन का मुख्य काम फरार शूटरों के ठहरने के लिए फर्जी पहचान पत्रों (Fake IDs) का इंतजाम करना होता था, ताकि वे पुलिस की रडार से बचकर होटलों में सुरक्षित छिप सकें।
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मनी ट्रांसफर और हथियार: नवीन शुरुआत में बैंक खातों के माध्यम से हिमांशु भाऊ का भेजा हुआ पैसा आगे ट्रांसफर करता था। बाद में भरोसा बढ़ने पर उसे शूटरों तक अवैध हथियार और कारतूस पहुंचाने के काम में लगा दिया गया।
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एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल: गैंग का पूरा तालमेल बेहद सुरक्षित इंटरनेट-बेस्ड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होता था। विदेश में बैठा हिमांशु भाऊ खुद सीधे इन गुर्गों के संपर्क में रहता था और उन्हें निर्देश देता था कि पैसे कहाँ से लेने हैं और हथियार किस ठिकाने पर डिलीवर करने हैं।
🎯 लॉजिस्टिक सपोर्टर से ‘टारगेट किलर’ बनने का खतरनाक प्लान
अगस्त 2026 में जब गैंग के कुछ मुख्य शूटर पुलिस के हत्थे चढ़ गए, तो हिमांशु भाऊ ने अपना 'बैकअप प्लान' एक्टिवेट कर दिया।
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प्रमोशन और अगला टास्क: गैंगस्टर ने मुर्सलीन (गुल्लू) का प्रमोशन करके उसे एक सक्रिय ‘शूटर’ के रूप में तैयार करना शुरू कर दिया था। उसे आधुनिक हथियार भी मुहैया करा दिए गए थे और वह किसी बड़े बिजनेसमैन या विरोधी की ‘टारगेट किलिंग’ या रेकी करने के अगले आदेश का इंतजार ही कर रहा था कि उससे पहले ही स्पेशल सेल ने उसे दबोच लिया।
⚖️ स्पेशल सेल की आगे की कार्रवाई और कड़ियां जोड़ती पुलिस
इन दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी से हिमांशु भाऊ गैंग की रीढ़ मानी जाने वाली फंडिंग और लॉजिस्टिक सप्लाई लाइन को बड़ा झटका लगा है। स्पेशल सेल अब दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह गहराई से खंगाल रही है कि विदेश से भेजा जा रहा काला धन भारत में किन-किन शेल बैंक खातों में रूट हो रहा था, मध्य प्रदेश या यूपी के मुख्य हथियार सप्लायर कौन हैं, और दिल्ली-एनसीआर में अगला कौन सा शख्स इस गैंग के निशाने पर था।
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