छतरपुर के बाजारों में छाई करवा चौथ की रौनक, ऑनलाइन को छोड़ महिलाओं ने की दुकानों पर जमकर खरीदारी
करवा चौथ के मौके पर छतरपुर के बाजारों में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। ऑनलाइन खरीदारी के दौर में भी महिलाओं ने स्थानीय बाजारों से मेहंदी, चूड़ी और पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी की।
छतरपुर । इस बार के करवा चौथ पर्व ने छतरपुर जिले के बाजारों में जबरदस्त रौनक और बहार ला दी है। सुहागिन महिलाओं ने कहीं अपने हाथों में पिया के नाम की खूबसूरत मेहंदी लगवाई, तो कहीं सजी-धजी पूजा की थाली और फैंसी छलनी ने उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया।
आज के इस डिजिटल और ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में भी बाजारों में महिलाओं की भारी चहल-पहल और भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने मेहंदी से लेकर मैचिंग चूड़ियां, गहने और स्पेशल पूजा थाली सेट तक हर जरूरी सामान की जमकर खरीदारी की। महिलाओं के इस भारी उत्साह को देखकर स्थानीय व्यापारियों के चेहरे भी खुशी से खिल उठे हैं, और दुकानदारों का कहना है कि इस करवा चौथ पर उनकी बंपर बिक्री हुई है।
🌙 पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत, परंपरा और नए जमाने के अंदाज का अनूठा संगम
आज देश भर की तरह छतरपुर में भी सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए निर्जला करवा चौथ का व्रत रखा।
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सोलह श्रृंगार और उल्लास: इस बार सुहागिनों की तैयारियों में प्यार, परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल नजर आया। महिलाओं ने अपनी साड़ियों से मैचिंग करती हुई पूजा की थालियां खरीदीं। इसके अलावा चूड़ियां, बिंदी, आभूषण और सोलह श्रृंगार की अन्य वस्तुओं के लिए बाजारों में खूब रौनक रही।
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मेहंदी का खास क्रेज: करवा चौथ का व्रत रखने वाली नीलम सोनी ने बताया, "मेहंदी सिर्फ हाथों की सजावट नहीं, बल्कि प्रेम जताने का खास तरीका है। किसी ने हथेली पर पति का नाम लिखवाया तो किसी ने चांद, सितारों और जोड़े वाली डिजाइन पसंद की। यह त्योहार यादों को सहेजने का बेहतरीन मौका है।"
📈 बाजारों में आया जबरदस्त बूम, स्थानीय व्यापारियों की आमदनी में हुआ इजाफा
करवा चौथ की खरीदारी के लिए छतरपुर जिले के मुख्य बाजार जैसे चौक बाजार, बजरिया, महल तिराहा, छत्रशाल चौक, पन्ना नाका, बिजावर नाका और सटई रोड के बाजारों में खरीदारों का तांता लगा रहा।
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व्यापारियों की बल्ले-बल्ले: बजरिया के प्रतिष्ठित व्यापारी डालडा मातेले ने खुशी जताते हुए कहा, "इस बार महिलाओं ने ऑनलाइन ऑर्डर करने के बजाय खुद बाजार में आकर खरीदारी की है। महिलाओं के आने से बिक्री में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे हम व्यापारियों की आमदनी में भी अच्छा-खासा इजाफा हुआ है।"
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स्थानीय बाजारों की चमक बरकरार: स्थानीय चूड़ी विक्रेता रमा लखेरा का कहना है कि बाजारों में उमड़ रही यह भीड़ इस बात का सबूत है कि ऑनलाइन के इस दौर में भी हमारे पारंपरिक स्थानीय बाजारों की चमक फीकी नहीं पड़ी है।
👵 'परंपरा वही, उत्सव मनाने का अंदाज बदला'
विवाह के बाद से लगातार हर साल करवा चौथ का व्रत रख रही स्थानीय निवासी नीलम सोनी मानती हैं कि भारतीय संस्कृति में यह पर्व सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक है। वक्त के साथ खरीदारी के तरीके भले ही आधुनिक हो गए हों, लेकिन करवा चौथ के प्रति महिलाओं की आस्था और इसकी सांस्कृतिक परंपरा आज भी उतनी ही पवित्र और कायम है।
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