बुरहानपुर कलेक्ट्रेट में दिखा भावुक पल; 9 साल से दिव्यांग पति को पीठ पर ढो रही बुजुर्ग महिला, मांगी ट्राई-साइकिल और पेंशन
बुरहानपुर कलेक्ट्रेट में एक बुजुर्ग महिला अपने दिव्यांग पति को पीठ पर लादकर पहुंची। महिला ने कलेक्टर से पति के लिए ट्राई-साइकिल और पेंशन दिए जाने की गुहार लगाई।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर कलेक्ट्रेट कार्यालय में मौजूद लोग उस समय पूरी तरह से हैरान और भावुक रह गए, जब एक दुबली-पतली बुजुर्ग महिला अपने दिव्यांग पति को अपनी ही पीठ पर लादकर कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंची। वृद्धा ने अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती बताते हुए कलेक्टर से अपने असहाय पति के लिए एक ट्राई-साइकिल और सामाजिक सुरक्षा पेंशन दिलाए जाने की गुहार लगाई। वृद्धा ने नम आंखों से बताया कि वह पिछले कई सालों से अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काट चुकी है, लेकिन उसकी तकलीफ और दर्द को समझने की कोशिश आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने नहीं की।
🏥 पैरालिसिस के बाद काटना पड़ा था पैर, 9 साल से दर-दर भटक रही पत्नी
बुरहानपुर की महाजन कॉलोनी निवासी दयाशंकर को उनकी पत्नी बिंदूबाई अपनी पीठ पर बैठाकर जिला कलेक्टर विवेक कुमार के पास लेकर पहुंची थीं। कलेक्ट्रेट में जिसने भी इस दृश्य को देखा, उसकी आंखें भर आईं।
बिंदूबाई ने कलेक्टर को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि “करीब 9 साल पहले उनके पति दयाशंकर को अचानक पैरालिसिस (लकवा) हो गया था। गंभीर इलाज के दौरान उनका एक पैर काटना पड़ा, जिसके बाद से वे पूरी तरह से विकलांग और असहाय हो गए। बीते 9 वर्षों से वह अपने पति को पीठ पर बैठाकर मदद पाने के लिए दर-दर भटक रही हैं, लेकिन अब तक न तो उन्हें ट्राई-साइकिल मिली है और न ही पेंशन योजना का लाभ मिल सका है।”
🗣️ 'अब शारीरिक ही नहीं मानसिक पीड़ा भी होने लगी है'—बुजुर्ग महिला ने सुनाई दास्तान
वृद्धा ने कलेक्टर से अपना दुख साझा करते हुए कहा कि “वह अपने पति को पीठ पर लादकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है, जिससे उसे अत्यधिक शारीरिक पीड़ा होती है। लेकिन अब शारीरिक पीड़ा से ज्यादा मानसिक पीड़ा होने लगी है कि इतनी गुहार लगाने के बाद भी कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है। ढलती उम्र में उन्हें केवल एक ट्राई-साइकिल की बेहद जरूरत है ताकि पति का आवागमन आसान हो सके, साथ ही अभी तक सरकारी पेंशन भी शुरू नहीं हुई है।”
📜 दिव्यांग कल्याण विभाग के अधिकारी ने दिया नियमों का हवाला
इस पूरे संवेदनशील मामले पर नि:शक्त कल्याण एवं दिव्यांग विभाग के अधिकारी दुर्गेश कुमार दुबे ने विभागीय नियमों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की:
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पूर्व में मिली थी व्हीलचेयर: अधिकारी ने बताया कि दयाशंकर को 2 साल पहले एक शासकीय कार्यक्रम के दौरान व्हीलचेयर प्रदान की गई थी।
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नियमों की बाध्यता: शासकीय नियमानुसार दी गई सामग्री की न्यूनतम अवधि 3 साल की होती है। इसलिए अब एक साल बाद ही नियमों के तहत ट्राई-साइकिल उपलब्ध कराई जा सकती है।
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जल्द समाधान का आश्वासन: हालांकि, मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में पहुंच चुका है, इसलिए मानवीय आधार पर जल्द ही कोई न कोई वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी। इसके अलावा पेंशन की मांग को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारी को त्वरित कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जाएगा।
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