एमपी हाईकोर्ट न्यूज़: आपसी सहमति और लिव-इन एग्रीमेंट का मामला मानकर सीनियर वकील को हाईकोर्ट से मिली राहत
जबलपुर में जूनियर महिला एडवोकेट के कथित यौन शोषण और धर्म परिवर्तन मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट को अग्रिम जमानत दे दी है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने जूनियर महिला एडवोकेट का कथित तौर पर यौन शोषण करने और धर्म परिवर्तन कराने का दबाव बनाने के संगीन आरोपों में घिरे एक सीनियर एडवोकेट को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने मामले की गहन सुनवाई के बाद प्रथम दृष्टया दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से बने संबंध का मामला मानते हुए आरोपी सीनियर अधिवक्ता को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) का लाभ प्रदान कर दिया है।
👮♀️ वकालत की प्रैक्टिस के दौरान यौन शोषण के गंभीर आरोप; थाने में दर्ज कराई गई थी एफआईआर
मामले की पृष्ठभूमि और पीड़िता के आरोप:
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सिविल लाइन थाने में शिकायत: छतरपुर निवासी 32 वर्षीय महिला अधिवक्ता ने जबलपुर के सिविल लाइन थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि वकालत की प्रैक्टिस के दौरान वह एक सीनियर एडवोकेट के संपर्क में आई थी, जो एक विशेष धर्म से संबंध रखते हैं।
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विवाह का आश्वासन: पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने उसे अपने मार्गदर्शन में काम दिलाने और रहने के लिए किराए का कमरा दिलाने में मदद की। इसके बाद अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर उससे विवाह करने का भरोसा दिलाया और शारीरिक संबंध स्थापित किए।
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ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण का दबाव: महिला अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इस दौरान आरोपी ने उसके आपत्तिजनक वीडियो बनाए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करते हुए धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाने लगा।
✍️ कोर्ट के समक्ष रखे गए लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट और शपथ पत्र के साक्ष्य
बचाव पक्ष के तर्क और दस्तावेज:
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आपसी सहमति का तर्क: सीनियर एडवोकेट की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी करते हुए तर्क दिया गया कि दोनों ही बालिग हैं और एक ही कानूनी पेशे से जुड़े परिपक्व अधिवक्ता हैं। उनके बीच जो भी संबंध स्थापित हुए, वे पूरी तरह से स्वेच्छा से बनाए गए थे।
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26 फरवरी 2026 का शपथ पत्र: कोर्ट के समक्ष 26 फरवरी 2026 को निष्पादित एक शपथ पत्र का हवाला देते हुए बताया गया कि शिकायतकर्ता ने आरोपी से विवाह करने की इच्छा स्वयं व्यक्त की थी।
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20 जुलाई 2026 का लिव-इन एग्रीमेंट: इसके अलावा अदालत में 20 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों के बीच निष्पादित हुआ विधिवत लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट (Live-In Relationship Agreement) भी प्रस्तुत किया गया।
🏛️ हाईकोर्ट की केस डायरी पर समीक्षा और अग्रिम जमानत का अंतिम आदेश
हाईकोर्ट के निर्णय का आधार:
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अभियोजन का विरोध: सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता के वकील ने सीनियर एडवोकेट की अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया गया, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया।
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केस डायरी का अवलोकन: हाईकोर्ट ने जब केस डायरी का गहनता से अवलोकन किया, तो पाया कि एफआईआर के अनुसार दोनों वर्ष 2024 से लगातार संपर्क में थे। शिकायतकर्ता द्वारा 3 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज कराई गई, जबकि इस बीच फरवरी 2026 में शपथ पत्र और जुलाई 2026 में लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट निष्पादित किए जा चुके थे।
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अग्रिम जमानत मंजूर: इन तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर सीनियर एडवोकेट को अग्रिम जमानत का लाभ देने का आदेश जारी कर दिया।
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